रांची (RANCHI): राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) की अधिग्रहीत सरकारी जमीन से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में सोमवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया. मामले की नामजद आरोपी सुमित्रा कुमारी बड़ाईक और मुन्नी कुमारी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत में सरेंडर कर दिया. अदालत में सरेंडर के बाद दोनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके जमा कराने की शर्त पर नियमित जमानत दे दी गई. दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए निचली अदालत में आत्मसमर्पण किया. इससे पहले हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम राहत देते हुए आदेश दिया था कि वे दो सप्ताह के भीतर ACB कोर्ट में उपस्थित होकर सरेंडर करें.
बता दें, यह मामला वर्ष 1964-65 में तत्कालीन RMCH (वर्तमान RIMS) के लिए अधिग्रहीत लगभग 9.65 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है. जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी वंशावली और दस्तावेज तैयार किए. इन कथित फर्जी कागजातों के आधार पर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया. आरोप है कि इस जमीन पर अपार्टमेंट, दुकानें और निजी मकान तक बना दिए गए. मामला सामने आने के बाद इसे राज्य के चर्चित भूमि घोटालों में शामिल माना गया.
झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच एसीबी को सौंपी गई थी. एसीबी ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज की और 7 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस मामले में आधा दर्जन से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है. एसीबी का कहना है कि पूरे नेटवर्क और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है तथा जांच के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
