☰
Jharkhand

JPSC 14वीं PT में ‘सेटिंग’ का खेल! 3 अभ्यर्थियों पर 10-10 लाख देने का लगा आरोप

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और फर्जीवाड़े की जांच के दौरान सीआईडी ने अदालत के सामने तीन अभ्यर्थियों से जुड़े कई अहम साक्ष्य पेश किए हैं. आरोपियों की पहचान मनोज कुमार, उमाकांत उरांव और रोशन केरकेट्टा के रूप में हुई है. जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों ने परीक्षा में अनुचित लाभ हासिल करने के लिए कथित सेटिंग सिंडिकेट से संपर्क किया था. सीआईडी का दावा है कि मामले में उनकी भूमिका महज परीक्षा देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे कथित तौर पर पहले से तैयार किए गए नेटवर्क का हिस्सा थे.

बिचौलिये को 10-10 लाख रुपये देने का आरोप
सीआईडी की जांच के मुताबिक, तीनों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में लाभ लेने के लिए बिचौलिये रमेश कुमार को करीब 10-10 लाख रुपये दिए थे. जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि अभ्यर्थियों ने अपने मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ OMR शीट की कार्बन कॉपियां भी रमेश कुमार और उससे जुड़े लोगों को सौंपी थीं. जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें परीक्षा के दौरान केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर भरने को कहा गया था, जिनके बारे में वे पूरी तरह आश्वस्त थे. अन्य प्रश्नों को खाली छोड़ने का निर्देश दिया गया था. सीआईडी का आरोप है कि इसके पीछे परीक्षा के बाद OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव करने की योजना थी.

OMR में बाद में जवाब भरने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों की खाली छोड़ी गई OMR शीट में कथित तौर पर बाद में उत्तर भरने की व्यवस्था की गई थी. सीआईडी का आरोप है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से जुड़े कुछ कर्मियों और प्रोग्रामरों की मदद से OMR में बदलाव किया जाता था. जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि परीक्षा केंद्र से अभ्यर्थियों के निकलने के बाद OMR शीट की कार्बन कॉपियां कथित तौर पर रमेश कुमार के जरिए सिंडिकेट तक पहुंचाई गई थीं. इन प्रतियों का इस्तेमाल परीक्षा के बाद कथित हेरफेर की तैयारी के लिए किया जाना था.

OMR की कॉपी नहीं कर सके पेश
सीआईडी के अनुसार, पूछताछ के दौरान जब तीनों अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया, तो वे इसे प्रस्तुत नहीं कर सके. वहीं, आरोपियों की ओर से अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए यह दलील दी गई कि उन्होंने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की है. सीआईडी ने आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे हैं. मामले में अदालत में सुनवाई जारी है और जांच एजेंसी की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की न्यायिक जांच हो रही है. फिलहाल अदालत की ओर से मामले में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है.