☰
Jharkhand

रांची का Remix Fall बना ‘मौत का कुआं’! नहाने के दौरान अब तक दर्जनों की मौत

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में मानसून के साथ ही राज्य के खूबसूरत डैम, वाटरफॉल और पिकनिक स्पॉट पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है. बारिश के मौसम में प्राकृतिक नजारे लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन यही खूबसूरती कई बार जानलेवा भी साबित हो जाती है. तेज पानी का बहाव, फिसलन भरी चट्टानें और गहरे पानी के बीच फोटो-सेल्फी लेने का शौक हादसे का कारण बन रहा है. ऐसे मामलों को देखते हुए अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गयी है कि कहीं उनके बच्चे बिना बताए ऐसी जगहों पर तो नहीं जा रहे. इसी बीच खूंटी से सामने आया एक मामला इस चिंता को और गंभीर बना देता है.  ये कोई पहली घटना नहीं है, झारखंड में ऐसे दर्जनों मामले आ रहे है जिसमें इस हादसे से मौत हो गई.

दरअसल, मरंगहादा थाना क्षेत्र स्थित रीमिक्स फॉल में शनिवार को नहाने के दौरान 19 वर्षीय इंटर छात्र नितेश कच्छप की डूबने से मौत हो गयी. नितेश रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र के कुशाई घाघरा गांव का रहनेवाला था और संत अलोइस इंटर कॉलेज में इंटर प्रथम वर्ष में पढ़ता था. परिजनों के अनुसार, नितेश कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन दोस्तों के साथ रीमिक्स फॉल पहुंच गया. नितेश को तैरना नहीं आता था. नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया. करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद स्थानीय गोताखोरों ने उसका शव बाहर निकाला. घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है.

मानसून में बढ़ जाता है वाटरफॉल का खतरा

बारिश के कारण राज्य के कई वाटरफॉल और जलस्रोतों में पानी का बहाव तेज हो जाता है और कई जगहों पर अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है. ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को वाटरफॉल और गहरे जलस्रोतों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी जाती है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग पिकनिक और घूमने के लिए इन जगहों पर पहुंचते हैं. पिछले कुछ दिनों में झारखंड के अलग-अलग वाटरफॉल में डूबने और हादसों के कई मामले सामने आए हैं. कई लोगों की जान पानी में गिरने, फिसलने या तेज बहाव की चपेट में आने से गयी है.

सेल्फी और फोटो के चक्कर में जान जोखिम में

वाटरफॉल पर पहुंचने वाले कई लोग खूबसूरत नजारे के बीच फोटो और सेल्फी लेने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं. फिसलन भरी चट्टानों और गहरे पानी के किनारे खड़े होकर तस्वीर लेने की कोशिश कई बार जानलेवा साबित होती है. खासकर मानसून के दौरान चट्टानों पर काई जमने और पानी का बहाव बढ़ने से खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में महज कुछ सेकेंड की तस्वीर के लिए जिंदगी को खतरे में डालना भारी पड़ सकता है.

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ी

नितेश की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है. एक छात्र अपने माता-पिता से कॉलेज जाने की बात कहकर निकला और दोस्तों के साथ वाटरफॉल पहुंच गया. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बच्चे घर से निकलते समय गलत जानकारी देकर ऐसी जगहों पर पहुंचेंगे, तो अभिभावक उन पर कैसे भरोसा कर पाएंगे. बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि दोस्तों के दबाव या घूमने के उत्साह में अपनी सुरक्षा से समझौता न करें. वहीं, अभिभावकों को भी बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और यह समझाने की जरूरत है कि मानसून के दौरान वाटरफॉल, नदी और अन्य गहरे जलस्रोतों से दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित है.