Religion

रांची में शुरू हुई दो दिवसीय शिव शिष्यता कार्यशाला, अलग-अलग राज्यों से जुटे 550 से अधिक श्रद्धालु

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

रांची(RANCHI): शिव शिष्य परिवार की ओर से रांची के अग्रसेन भवन में शनिवार, 1 अगस्त से दो दिवसीय शिव शिष्यता कार्यशाला की शुरुआत हुई. कार्यशाला का समापन 2 अगस्त को होगा. इस कार्यक्रम में  अलग-अलग राज्यों से 550 से ज्यादा लोग पहुंचे हैं. दो दिनों तक शिव शिष्यता, गुरु-शिष्य परंपरा और भगवान शिव के बताए जीवन मूल्यों पर चर्चा की जाएगी. पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई. इसके बाद महागुरु महादेव, साहब श्री हरीन्द्रानंद जी और दीदी नीलम आनंद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया.

कैसे शुरू हुई शिव शिष्यता, बताया पूरा सफर

कार्यशाला की मुख्य वक्ता बरखा आनंद ने बताया कि साहब श्री हरीन्द्रानंद जी बचपन से ही जीवन के रहस्यों को समझना चाहते थे. उन्होंने कई आध्यात्मिक रास्तों को करीब से जाना, लेकिन मन को सच्ची शांति नहीं मिली. आखिरकार वर्ष 1974 में उन्होंने भगवान शिव को अपना गुरु मान लिया. इसके बाद उनके जीवन में कई ऐसे अनुभव आए, जिन्होंने उन्हें लोगों को शिव का शिष्य बनने के लिए प्रेरित करने का संकल्प दिया. उन्होंने बताया कि 1980 के दशक से शिव शिष्यता का यह संदेश धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने लगा.

शिव हमारी संस्कृति और पहचान का हिस्सा हैं

अर्चित आनंद ने कहा कि भगवान शिव भारत की संस्कृति और आस्था के केंद्र में हैं. देश के हर हिस्से में उनकी पूजा होती है. उन्होंने कहा कि शिव सिर्फ आराध्य देव नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले गुरु भी हैं.

गुरु के प्रति सम्मान का दिया संदेश

शिव शिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद ने कहा कि गुरु शिव की कृपा ही सबसे बड़ी दीक्षा है. अपने गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता ही सच्ची गुरु दक्षिणा है. कार्यशाला में कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे, जबकि अलग-अलग राज्यों से आए लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिव शिष्य परिवार के कई सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई. कार्यशाला का दूसरा और अंतिम सत्र 2 अगस्त को आयोजित होगा.