Jharkhand

बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने से पहले पढ़ लें यह जरूरी खबर, 1 जुलाई तक करना होगा इंतजार, जानिए क्यों

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने से पहले पढ़ लें यह जरूरी खबर, 1 जुलाई तक करना होगा इंतजार, जानिए क्यों

रांची (RANCHI): आमतौर पर लोग बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने जैसे कामों को काफी उलझा हुआ समझते हैं. लोगों को लगता है इस एक काम में उन्हें घंटों का इंतजार करना पड़ेगा और कभी-कभी तो लोगों को सर्टिफिकेट जैसे डॉक्युमेंट्स बनवाने के लिए कार्यालय के कई चक्कर भी लगाने पड़ते हैं. ऐसे में अगर आप भी राजधानी रांची में रहते और बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने की सोच रहे हैं तो जरा ठहरिए, क्योंकि अगर आप पुराने जन्म प्रमाणपत्र (ओल्ड बर्थ सर्टिफिकेट) बनवाने, उसमें सुधार कराने या उसके आधार पर नया प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए रांची नगर निगम पहुंच रहे हैं, तो फिलहाल आपको इंतजार करना पड़ सकता है. नगर निगम ने पुराने जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़े नए आवेदनों की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी है. इसकी मुख्य वजह केंद्र सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल में किए गए नए तकनीकी बदलाव हैं, जिनके कारण सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है.

नगर निगम कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े कार्यों के लिए पहुंचते हैं. पासपोर्ट, स्कूल-कॉलेज में नामांकन, सरकारी योजनाओं और नौकरी जैसे जरूरी कार्यों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन पोर्टल में बदलाव के बाद पुराने रिकॉर्ड की जांच और नए प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में बाधा आ गई है. इससे लोगों को बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि अधिकारियों के पास भी फिलहाल स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं.

1 जुलाई से फिर शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, एक जुलाई से आवेदन लेने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की तैयारी है. हालांकि नई व्यवस्था के तहत पुराने जन्म प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवेदकों को केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के संबंधित कार्यालयों में भी जाना पड़ सकता है. इससे खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े ऑनलाइन बदलाव लागू करने से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण और आम लोगों को पर्याप्त जानकारी देना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं होने से स्थिति और जटिल हो गई है.

पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन बना बड़ी चुनौती

नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने रिकॉर्ड की जांच को लेकर है. कुछ वर्ष पहले जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में प्रज्ञा केंद्रों की भी भूमिका थी. उस दौरान जारी कई प्रमाणपत्रों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड निगम के पास उपलब्ध नहीं है. ऐसे मामलों में नया प्रमाणपत्र या संशोधन कराने वाले लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन जिला सांख्यिकी पदाधिकारी (DSO) कार्यालय के माध्यम से कराया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि जिन प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड नगर निगम के पास उपलब्ध है, उनके सत्यापन में ज्यादा परेशानी नहीं होगी. लेकिन जिन मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहां प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है. इसी कारण फिलहाल आवेदन लेने की प्रक्रिया रोककर नई व्यवस्था को समझने और तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने का काम किया जा रहा है.