Jharkhand

राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के साथ खेल के बाद तेवर में राजद,क्या होगा गठबंधन का अंजाम  

Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के साथ खेल के बाद तेवर में राजद,क्या होगा गठबंधन का अंजाम  

रांची(RANCHI): राज्यसभा चुनाव में गठबंधन की एकता पर सवाल उठा. चुनाव से पहले एक जुट दिखने वाले गठबंधन के विधायकों ने मतदान के समय विपक्षी खेमे के साथ चले गए. जिससे राज्य में राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. चुनाव में अपनो के हाथों हार का सामना कर कांग्रेस ने अपनी सहयोगी दल राजद और माले पर निशाना साधा. जिसके बाद राजद ने पलटवार करते हुए प्रभारी को ही भाजपा का एजेंट बता दिया. और कांग्रेस को सरकार से बाहर करने की मांग सीएम से कर डाली. शुक्रवार को राजद प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रीय जनता दल के महासचिव भोला यादव के साथ सभी चार विधायकों ने प्रेस वार्ता किया.  

जिसमें भोला यादव ने कहा कि झारखंड में हमेशा गठबंधन के साथ राजद खड़ी रही है. राजद कभी धोखा नहीं देती है. पार्टी के हमेशा भाजपा से लड़ाई लड़ी है. उनके नेता ने कभी ये नहीं सिखाया है कि धन बल के आगे झुक जाए. राजद का चार वोट था जो कांग्रेस के उम्मीदवार को मिला है.खुद कांग्रेस के लोगों ने क्रॉस वोट किया है. प्रदेश प्रभारी के राजू को बयान देने से पहले पार्टी में समीक्षा करने की जरूरत है.राजद पर आरोप लगाना सही नहीं है. इस पूरे वोटिंग प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए. कांग्रेस के प्रभारी के राजू अपनी गलती को छुपाने के लिए अनर्गल बयान दे रहे है.

राजद के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार यादव ने कहा कि राजद की एक विचारधारा है.इस विचारधारा के तहत ही सभी चार विधायकों ने इंडिया गठबंधन को वोट किया है. कांग्रेस पार्टी के द्वारा अनर्गल बयान देने से पहले 20 साल आगे और पीछे देखना चाहिए. राजद को कभी कांग्रेस के भरोसे राजनीति करने की जरूरत नहीं है. राजद अपने नेता के बताए रास्ते पर चल कर लड़ाई लड़ रही है. कांग्रेस प्रभारी को बयान देने से पहले हजार बार सोचने की जरूरत है.

मंत्री समय प्रसाद यादव ने कहा कि कांग्रेस का पुराना इतिहास है. कुछ साल पहले ही कांग्रेसी विधायक पकड़े गए थे. पहले कांग्रेस प्रभारी को अपने अंदर झाकने की जरूरत है. राजद कभी भी भाजपा के साथ नहीं गई है. लेकिन प्रदेश प्रभारी बिना सोचे समझे इस बयान दे रहे है. कांग्रेस के प्रभारी खुद कई  गुट संगठन में बना कर रखे है. खुद क्रॉस वोट करवाने के बात अपनी बात को छुपाने के लिए राजद पर सवाल खड़ा कर रहे है.

क्या है पूरा मामला            

दरअसल बीते गुरुवार को झारखंड की दो राज्यसभा सीट पर चुनाव सम्पन्न हुआ. इस चुनाव में जीत का आकड़ा इंडिया के पास होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा. एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को जीत मिली. इस चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने बयान दिया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने एक जुटता के साथ वोट किया. लेकिन राजद और माले से धोखा मिला. इसकी समीक्षा करेंगे.

क्या है जीत और हार का अंतर

झारखंड में दो राज्यसभा सीट के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतरे. झारखंड मुक्ति मोर्चा से बैजनाथ नाथ,कांग्रेस ने प्रणव झा और निर्दलीय परिमल नाथवानी ने नामांकन किया. बाद में निर्दलीय उम्मीदवार को एनडीए ने समर्थन दिया और जीत का दावा कर दिया. लेकिन आकड़े एनडीए के पास मौजूद नहीं थे. 24 विधायकों के साथ एनडीए हर बार जीत का दावा करती रही. जबकि कांग्रेस-झामुमो-राजद-माले को मिला कर बहुमत का आकड़ा इनके पास मौजूद था. लेकिन जब वोटिंग हुई. इसमें एक सीट पर झामुमो के बैजनाथ राम की जीत हुई. झामुमो को 30 वोट मिले. जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को 20 पर ही संतुष्ट होना पड़ा. वहीं निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को 28 वोट प्राप्त हुए. वहीं तीन वोट रद्द कर दिए गए.अब कांग्रेस की हार की वजह उनके ही गठबंधन के विधायक बने. जिन्होंने निर्दलीय को वोट कर दिया.