Jharkhand

राज्यसभा चुनाव: बैद्यनाथ राम का संसद पहुंचना लगभग तय, दूसरी सीट पर बाहरी चेहरों की एंट्री से बढ़ी सियासी सरगर्मी

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
राज्यसभा चुनाव: बैद्यनाथ राम का संसद पहुंचना लगभग तय, दूसरी सीट पर बाहरी चेहरों की एंट्री से बढ़ी सियासी सरगर्मी

रांची (RANCHI): झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होता जा रहा है. एक तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी सीट पर बाहरी और प्रभावशाली चेहरों की संभावित दावेदारी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बैद्यनाथ राम का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला काफी रोचक हो सकता है.

झामुमो द्वारा बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे दलित समाज को मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति भी देखी जा रही है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे सामाजिक संतुलन का संदेश जाएगा और संगठनात्मक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. विधानसभा के वर्तमान अंकगणित में झामुमो और उसके सहयोगियों की ताकत को देखते हुए उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है.

दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने संगठन के अनुभवी नेता प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है. प्रणव झा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में सचिव रह चुके हैं और पार्टी के कम्युनिकेशन तथा संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. बिहार के आनंदीपुर से संबंध रखने वाले प्रणव झा को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का करीबी माना जाता है. पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक कुशल मीडिया मैनेजर और संगठनकर्ता के रूप में रही है. हालांकि उनकी जीत सहयोगी दलों के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर करेगी.

राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उद्योग जगत से जुड़े परिमल नाथवाणी की संभावित सक्रियता को लेकर हो रही है. नाथवाणी पहले भी दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और बाद में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे. रिलायंस इंडस्ट्रीज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके नाथवाणी का झारखंड के कई राजनीतिक दलों और विधायकों के साथ व्यक्तिगत संबंध हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं. हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर उनके नाम को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नाथवाणी चुनावी मैदान में सक्रिय भूमिका निभाते हैं तो उनका सबसे बड़ा आधार दलगत राजनीति से ऊपर व्यक्तिगत संबंध हो सकते हैं. चर्चा यह भी है कि वे विभिन्न दलों के विधायकों के बीच स्वीकार्यता बनाने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि भाजपा ने अभी तक किसी आधिकारिक रणनीति या समर्थन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें जरूर लगाई जा रही हैं कि दूसरी सीट पर समीकरण अंतिम समय तक बदल सकते हैं. फिलहाल इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

इसी बीच पूर्व आंध्र प्रदेश नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद वी. साई रेड्डी का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में सामने आया है. साई रेड्डी लंबे समय तक दक्षिण भारतीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय नेता की रही है. हालांकि झारखंड राज्यसभा चुनाव में उनकी किसी औपचारिक दावेदारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाहरी और प्रभावशाली चेहरों की संभावित एंट्री को लेकर उनके नाम की चर्चा राजनीतिक हलकों में होती रही है.

दिलचस्प बात यह है कि झारखंड की राजनीति में बाहरी उम्मीदवारों का राज्यसभा पहुंचना कोई नया प्रयोग नहीं है. अतीत में भी कई ऐसे नेता और उद्योगपति झारखंड से राज्यसभा पहुंचे हैं, जिनकी मूल राजनीतिक या सामाजिक पृष्ठभूमि राज्य से बाहर की रही है. यही कारण है कि इस बार भी दूसरी सीट को लेकर तरह-तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं.

राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अब सभी की निगाहें नामांकन, समर्थन और अंतिम राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी हैं. जहां एक तरफ बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, वहीं दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा, संभावित निर्दलीय या प्रभावशाली बाहरी उम्मीदवारों तथा विभिन्न दलों के विधायकों के रुख पर सबकी नजर रहेगी. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि झारखंड की दूसरी राज्यसभा सीट गठबंधन राजनीति के पक्ष में जाती है या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण चुनाव को चौंकाने वाला मोड़ देता है.