रांची (RANCHI): झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं. चुनावी माहौल के बीच सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों और रणनीतियों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं. इसी क्रम में भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देने का फैसला किया है, जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है. द न्यूज़ पोस्ट की टीम से बातचीत करते हुए भाजपा मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप ने कहा कि पार्टी ने परिमल नाथवानी का समर्थन किसी राजनीतिक मजबूरी में नहीं, बल्कि उनके कामकाज और जनहित के प्रति उनकी सोच को देखते हुए किया है. उन्होंने कहा कि नाथवानी लंबे समय से झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे हैं और आम लोगों की समस्याओं को समझते हैं. यही वजह है कि भाजपा ने उनके पक्ष में खड़े होने का निर्णय लिया है.
जब उनसे राज्यसभा चुनाव में आवश्यक विधायकों के समर्थन और आंकड़ों के गणित को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी स्वयं परिमल नाथवानी की है. चूंकि वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए विभिन्न दलों और विधायकों से समर्थन जुटाने की प्रक्रिया भी उन्हें ही आगे बढ़ानी होगी. योगेंद्र प्रताप ने विश्वास जताया कि नाथवानी अपने अनुभव और संपर्कों के बल पर आवश्यक समर्थन प्राप्त करने में सफल रहेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपना समर्थन स्पष्ट रूप से दे दिया है और अब आगे की रणनीति परिमल नाथवानी तय करेंगे. उनके अनुसार राज्यसभा चुनाव में अक्सर राजनीतिक समीकरण आखिरी समय तक बदलते रहते हैं, इसलिए अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
इस दौरान भाजपा प्रवक्ता ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के संबंधों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर कई बार मतभेद सामने आते रहे हैं. उनके अनुसार कई ऐसे अवसर आए हैं जब झामुमो के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है. भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि गठबंधन में सब कुछ सामान्य नहीं है और समय-समय पर दोनों दलों के बीच असहमति देखने को मिलती रही है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अक्सर कमजोर भूमिका में दिखाई देती है, कई मुद्दों पर झामुमो अपनी बात खुलकर रखता है, जबकि कांग्रेस को बाद में सफाई देनी पड़ती है. भाजपा का मानना है कि राज्य की राजनीति में यह स्थिति लगातार देखने को मिल रही है. राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों की सक्रियता और बयानबाजी भी बढ़ती जा रही है. चुनावी गणित, विधायकों का समर्थन और दलों के बीच बनने-बिगड़ने वाले समीकरण आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प हो सकते हैं. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मतदान से पहले राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और राज्यसभा की दोनों सीटों पर आखिर किसे सफलता मिलती है. झारखंड की राजनीति में यह चुनाव अभी कई नए मोड़ ला सकता है.
रिपोर्ट- सौम्या शुक्ला
