रांची: झारखंड पुलिस मुख्यालय में चालक हवलदार के पद से परिवहन अवर निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति को लेकर केंद्रीय चयन पर्षद की बैठक आयोजित की गई. इस बैठक से संबंधित कार्यवाही का विवरण अब जारी कर दिया गया है. झारखंड पुलिस के आईजी प्रोविजन कार्यालय की ओर से जारी पत्र के मुताबिक चयन प्रक्रिया से जुड़ी यह बैठक 29 जुलाई को हुई थी. इसमें चालक हवलदारों की सेवा अवधि, उपलब्ध पदों और विभागीय अभिलेखों की जांच के आधार पर प्रोन्नति के लिए पात्र कर्मियों का आकलन किया गया.
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से परिवहन अवर निरीक्षक संवर्ग में कुल 10 पद स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से फिलहाल 7 पद रिक्त हैं. रिक्त पदों में सामान्य श्रेणी के 5 और अनुसूचित जनजाति श्रेणी के 2 पद शामिल हैं. इन पदों के लिए रोस्टर क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है.
प्रोन्नति की प्रक्रिया के तहत क्षेत्रीय चयन पर्षद की ओर से कुल 13 चालक हवलदारों के नाम केंद्रीय चयन पर्षद को भेजे गए थे. हालांकि, सूची में शामिल एक कर्मी बबन तिवारी 30 जून को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इसके बाद चयन पर्षद के समक्ष प्रोन्नति के लिए 12 चालक हवलदारों के नाम और उनके सेवा संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई.
चयन पर्षद ने सभी संबंधित कर्मियों की सेवा पुस्तिका और उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया. इस दौरान उनकी सेवा से जुड़ी जानकारी, पात्रता और निर्धारित मानकों के आधार पर प्रोन्नति के लिए योग्यता का आकलन किया गया. दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद 12 में से 11 चालक हवलदारों को परिवहन अवर निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति के लिए योग्य माना गया.
वहीं, जांच के दौरान एक चालक हवलदार निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. चयन पर्षद ने उन्हें प्रोन्नति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया. इस तरह उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 11 चालक हवलदार अब प्रोन्नति की प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए पात्र पाए गए हैं.
कुल स्वीकृत पदों की संख्या 10 होने के बावजूद वर्तमान में 7 पद रिक्त हैं. ऐसे में रिक्त पदों और आरक्षण रोस्टर के अनुसार ही आगे की प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाएगी. बैठक की कार्यवाही जारी होने के बाद अब संबंधित कर्मियों की नजर विभाग की ओर से जारी होने वाले अगले आदेश पर है.
इस प्रोन्नति से पुलिस विभाग में चालक हवलदारों को परिवहन अवर निरीक्षक के पद पर नई जिम्मेदारी मिलने का रास्ता साफ होगा. साथ ही विभागीय स्तर पर लंबे समय से चल रही प्रोन्नति प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
