Jharkhand

विधेयक का झारखंड पर संभावित असर: 1.36 लाख करोड़ बकाये का क्या होगा,कैसे चलेगी मंईयां सम्मान योजना?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

Tnp desk: झारखंड सहित खनिज उत्पादक राज्यों  को बड़ा झटका लगा है.  यह  झटका खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 के पारित होने के बाद लगा  हैं.  इस विधेयक से केंद्र सरकार ने राज्यों की शुल्क लगाने की शक्तियों को खत्म कर दिया है.  झारखंड पर तो इसका व्यापक असर पड़ेगा.  इस विधेयक  के पारित हो जाने के बाद झारखंड सरकार अब अपने बकाये  1.36 लाख  करोड़ रुपए का दावा भी   नहीं कर सकेगी. विधेयक  कहता है कि कानून के लागू होने से पहले राज्य सरकारों द्वारा वसूल या जमा किया गया कर वापस नहीं करना होगा, लेकिन कर की जो भी राशि बकाया होगी, वह कानून के लागू होने के बाद वसूल नहीं की जा सकेगी.  मतलब झारखंड का डिमांड खत्म हो जाएगा . 

 सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में राज्यों को खनिज अधिकारों पर सेस  लगाने के अधिकार की अनुमति दी थी.  इसके बाद तुरंत हेमंत सरकार ने झारखंड मिनिरल बेयरिंग  लैंड सेस  एक्ट 2024 लागू किया.  ऐसा करने वाला झारखंड देश का पहला राज्य बना.  यह एक्ट खनन वाली भूमि पर राज्य सरकार को एक विशेष उपकर लगाने का अधिकार देता है.  इस राशि का उपयोग  सामाजिक सुरक्षा और जनहित के कार्यों में किया जा सकता है लेकिन अब यह अधिकतर राज्यों से खत्म कर दिया गया है. झारखंड को अब बकाया 1.36 लाख करोड़ नहीं मिलेगा, साथ ही  नया कर लगाने का भी अधिकार खत्म जाएगा.  इसके बाद झारखंड सरकार की आमदनी कम हो जाएगी.  ऐसे में सरकार की योजनाओं पर असर पड़ेगा.

 राज्य की कमाई घटेगा तो सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा. फिर तो मं ई यां  सम्मान योजना, अबुआ  आवास योजना, स्वास्थ्य ,शिक्षा ,सड़क, पेयजल और ग्रामीण विकास,दो सौ यूनिट फ्री बिजली  जैसी योजनाओं पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा।  यह असर बड़ा  भी हो सकता है.  झारखंड में मं ई यां  सम्मान योजना चल रही है.  इसके अलावा कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शुरुआत हुई है.  राज्य सरकार को इन योजनाओं को लेकर बड़ी आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.  झारखंड की महत्वाकांक्षी मं ई यां  सम्मान योजना में हर महीने लाभुकों को ₹2500 का भुगतान किया जाता है.  लगभग झारखंड की 51 लाख महिला लाभुकों को यह राशि मिल रही है.  बता दे कि झारखंड की जमीन के नीचे सिर्फ कोयला ,लोहा और दूसरे खनिज पदार्थ नहीं है, बल्कि सरकार की इससे  बड़ी कमाई भी है.  वित्तीय वर्ष 26- 27 के बजट में झारखंड में मिनरल बेरिंग लैंड सेस  से करीब  16,656 करोड़ की आमदनी का अनुमान लगाया है .  अब केंद्र सरकार के नए बिल से इस पर रोक लग जाएगी.