Jharkhand

झारखंड में राजनीतिक बवाल: एक दूसरे को देख लेने की धमकी, राज्यसभा चुनाव का साइड इफेक्ट

Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर
झारखंड में राजनीतिक बवाल: एक दूसरे को देख लेने की धमकी, राज्यसभा चुनाव का साइड इफेक्ट

TNPDESK: झारखंड में दो सीटों पर राज्यसभा का चुनाव संपन्न हुआ. इस चुनाव ने कई सवाल खड़े किए हैं. सवाल बहुत ही गंभीर है जिसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं. निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से समीकरण आरंभ से ही रोचक बन गया था. कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के आने से सारा कुछ समझ में आ गया था कि मुकाबला रोचक होने वाला है और कहीं न कहीं परिमल नाथवानी अपने नाम अपने, अपने काम और अपने इंतजाम के बल पर मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं और आखिर में हुआ भी यही. परिमल नाथवानी को वोट 30 मिले. 

परिमल नाथवानी को आखिर कितने वोट मिले

यह स्पष्ट स्पष्ट है कि राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को हुए मतदान को लेकर सभी दलों ने कड़ी निगरानी रखी थी. एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 24 से अधिक वोट नहीं मिले, इसके लिए सारा इंतजाम सत्ता पक्ष के द्वारा दिखाने के लिए किया जा रहा था.लेकिन सत्ता पक्ष के ही कई विधायक परिमल नाथवानी को पसंद करते थे और परिणाम यही हुआ. परिमल नाथवानी को वैसे तो 30 वोट मिले. जिनमें दो वोटर रद्द हो गए. कुल 28 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के प्रणव झा को 20 वोट ही मिल पाए. इससे समझ में आ जाना चाहिए कि खेल कहां हुआ. 

कांग्रेस प्रभारी के राजू पर भी उठ रहे सवाल?
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने जिस प्रकार से बयान दिया वह भी सवालों के घेरे में है. रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद विधानसभा परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल और बीजेपी वाले के विधायकों पर कथित रूप से दगाबाजी का आरोप लगाया. इतनी त्वरित जानकारी उन्हें कैसे मिली? यह समझ जा सकता है. कुछ लोग तो यह बताते हैं कि कांग्रेस के ही विधायक प्रणव झा को वोट नहीं दिए. ऐसे तीन लोगों की चर्चा हो रही है.अब चूंकि के राजू को अपना कद बचाए रखना था. इसलिए यह आरोप राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा माले पर लगा दिया. राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा माले ने इस पर सफाई दे दी है और के राजू पर जोरदार हमला किया है. 

सूत्र बताते हैं कि मतदान में क्रॉस वोटिंग हुई. परिमल नाथवानी को जिताने के लिए सत्ता पक्ष के लोग भी उत्सुक थे.कारण समझा जा सकता है. कांग्रेस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है कि उसे 8 वोट क्यों नहीं मिले. कोई तर्क भी नहीं है. जबकि भाजपा नेताओं के द्वारा यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस के ही लोग क्रॉस वोटिंग किए हैं.अब सवाल यह उठ रहा है कि भविष्य क्या होगा. झारखंड में गठबंधन की सरकार चल रही है. चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल और बंद दल सभी एक साथ हैं विधानसभा में उनकी मजबूत संख्या है.कुल 56 विधायक हैं ऐसे में जो परिदृश्य उत्पन्न हुआ है उसमें आगे राजनीतिक समीकरण बदलने और ना बदलने के 50-50% चांस है. 

इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा की चुप्पी भी समझी जा सकती है.कुछ लोग तो कहते हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा सब कुछ देखकर आनंदित हो रहा है.