टीएनपी डेस्क(TNP DESK): राजधानी रांची में अब धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली, घेराव या आमसभा करने से पहले प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी. आयोजकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रांची सदर या बुंडू के अनुमंडल पदाधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी. रांची जिला प्रशासन ने शनिवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं. प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद शांतिपूर्ण कार्यक्रमों को रोकना नहीं, बल्कि सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात को बेहतर तरीके से संभालना है.
प्रशासन के मुताबिक, कई बार शहर में धरना, प्रदर्शन और रैलियां बिना पूर्व सूचना के आयोजित की जाती हैं. इससे सड़कों पर जाम लगने के साथ आम लोगों को परेशानी होती है. अचानक बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने में भी दिक्कत आ सकती है.
रैली का रूट और लोगों की संख्या बतानी होगी
जिला प्रशासन ने कहा है कि जुलूस या रैली निकालने से पहले आयोजकों को प्रस्तावित रूट की जानकारी देनी होगी. इसके साथ कार्यक्रम की तारीख, शुरू और खत्म होने का समय और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संभावित संख्या भी बतानी होगी.
जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों की जानकारी भी प्रशासन को देनी होगी. इससे पुलिस को सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पहले से तैयारी करने में मदद मिलेगी.
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. हालांकि, इसका इस्तेमाल कानून और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए.
छात्रों और आम लोगों से भी प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने छात्रों और आम नागरिकों से किसी प्रदर्शन या रैली में शामिल होने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है. लोगों से अफवाह या भ्रामक जानकारी के आधार पर कोई कदम नहीं उठाने को कहा गया है.
सार्वजनिक रास्तों को बिना अनुमति बाधित नहीं करने की भी हिदायत दी गई है. प्रशासन ने राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य संस्थाओं से नियमों का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है.