रांची(RANCHI): ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लोगों के चालान लगातार कट रहे हैं, लेकिन इन चालानों का भुगतान करना अब आसान नहीं रह गया है. सरकारी वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही हैं. ऐसे में लोग निजी वेबसाइट और ऐप का सहारा ले रहे हैं. परेशानी यह है कि इन पोर्टल पर चालान की असली रकम से कहीं ज्यादा पैसे मांगे जा रहे हैं. इससे आम लोगों की जेब पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ रहा है.
छह महीने से सरकारी पोर्टल में परेशानी
झारखंड सरकार का ई-चालान पोर्टल करीब छह महीने से ठीक से काम नहीं कर रहा है. केंद्र सरकार के परिवहन पोर्टल पर भी लोगों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कभी कैप्चा नहीं खुलता, तो कभी चालान का रिकॉर्ड ही नहीं मिलता. कोकर निवासी रंजीत कुमार ने भी बताया कि कई बार कोशिश करने के बाद उनके चालान की जानकारी सरकारी वेबसाइट पर नहीं मिली.
150 करोड़ रुपये से ज्यादा का चालान बकाया
जुलाई से सितंबर के बीच रांची में कुल 3,07,071 चालान काटे गए. यानी हर महीने औसतन एक लाख से ज्यादा चालान जारी हुए. दूसरी ओर, शहर में 150 करोड़ रुपये से अधिक की चालान राशि बकाया है.
ऑनलाइन भुगतान नहीं होने पर लोगों को ऑफलाइन प्रक्रिया अपनानी पड़ती है. तय समय सीमा खत्म होने के बाद मामला कोर्ट में चला जाता है. इसके बाद अनुमति लेकर कचहरी रोड स्थित ट्रैफिक कार्यालय के काउंटर पर भुगतान करना पड़ता है, जहां लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है.
ऐसे में लोगों की मांग है कि सरकारी पोर्टल को जल्द ठीक किया जाए और चालान भुगतान की प्रक्रिया आसान बनाई जाए, ताकि उन्हें एक्स्ट्रा अमाउन्ट और बेवजह की परेशानी से राहत मिल सके.