टीएनपी डेस्क(TNP DESK):रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में राज्यभर से छात्र एकजुट हुए हैं और जेपीएससी, सीजीएल समेत कई परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं. इनमें कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और बिना खाए-पिए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. वहीं, कई छात्र ऐसे भी हैं, जो लगातार हो रही बारिश के बावजूद धरना स्थल पर डटे हुए हैं और इस आंदोलन को मजबूती दे रहे हैं.लेकिन आज हम सिर्फ इस आंदोलन की बात नहीं करेंगे, बल्कि उस चर्चा की बात करेंगे, जो अब सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रही है. आखिर क्यों रांची में चल रहे झारखंड के छात्रों के इस आंदोलन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से की जा रही है.
आखिर क्यों हो रही दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन से तुलना, पढ़िए
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से छात्र एकजुट हुए थे. CJP पार्टी की अगुवाई में हुए इस धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया था. करीब एक महीने तक चले इस आंदोलन में आखिरकार छात्रों की जीत हुई. छात्रों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी, जो पूरी हुई. इसके अलावा छात्रों ने कई अन्य मांगें भी रखी थीं, जिन्हें सरकार ने मान लिया.
सोशल मीडिया पर हो रही है झारखंड के छात्रों की तारीफ
हालांकि, दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर रोजाना ऐसी-ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आते थे, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते थे. एक तरफ कुछ छात्रों की अजीबोगरीब हरकतें चर्चा में रहती थीं, तो दूसरी तरफ गाली-गलौज और अश्लीलता से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होते थे. इन घटनाओं को लेकर लोगों ने सवाल उठाए.वहीं, झारखंड में चल रहे छात्रों के आंदोलन की तस्वीर इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है. यहां छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. छात्र न तो किसी तरह की राजनीति कर रहे हैं और न ही किसी के खिलाफ गाली-गलौज या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर झारखंड के छात्रों की तारीफ भी हो रही है.
क्योंकि छात्र किसी राजनीतिक पार्टी ,धर्म के नहीं होते
अब सोशल मीडिया पर एक खेमा ऐसा भी है, जो दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन और रांची में चल रहे छात्रों के आंदोलन की तुलना कर रहा है. कई लोग झारखंड के छात्रों का उदाहरण देते हुए कह रहे हैं कि छात्रों का आंदोलन ऐसा ही होना चाहिए.दरअसल, स्टूडेंट किसी पार्टी के नहीं होते, न किसी धर्म के होते हैं और न ही किसी जाति के. झारखंड के छात्र भी केवल अपने हक और अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है. वे न तो मुख्यमंत्री को गाली दे रहे हैं, न प्रधानमंत्री को गाली दे रहे हैं और न ही किसी व्यक्ति को टारगेट कर रहे हैं.उनका मुद्दा साफ है. छात्रों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए, पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाई जाए और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए. छात्र चाहते हैं कि मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो.
रांची छात्र आंदोलन सोशल मीडिया पर बनी चर्चा का विषय
बारिश हो या धूप, छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. यही तस्वीर अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग कह रहे हैं कि छात्र जब अपने अधिकार और भविष्य के लिए लड़ें, तो आंदोलन का स्वरूप भी ऐसा ही होना चाहिए.रांची में चल रहे आंदोलन ने देश भर में झारखंड के अच्छे व्यवहार का परिचय दिया है हर तरफ झारखंड की तारीफ हो रही है लोग कह रहे हैं कि छात्र ऐसे ही होते है.
