रांची (RANCHI): देश की राजनीति में शायद यह पहली बार देखने को मिला कि छात्रों के लंबे और व्यापक आंदोलन के दबाव के बाद केंद्र सरकार को अपना शिक्षा मंत्री बदलना पड़ा. भाजपा के 12 वर्षों के कार्यकाल में कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन यह आंदोलन अलग साबित हुआ. इसकी शुरुआत भले ही मजाक और सोशल मीडिया पर उठी कुछ पोस्ट से हुई हो, लेकिन धीरे-धीरे यह देशभर के छात्रों का जनआंदोलन बन गया. लगातार विरोध, धरने और छात्रों की एकजुटता के बीच आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई. इस खबर के आते ही देश के कई हिस्सों में छात्रों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया. झारखंड की राजधानी रांची का अल्बर्ट एक्का चौक भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना.
जैसे ही छात्रों को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिली, अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में छात्र जुटने लगे. कुछ ही देर में पूरा चौक खुशी और उत्साह से भर गया. छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी और लंबे संघर्ष के बाद मिली इस सफलता का जश्न मनाया. कई छात्र तिरंगा लेकर पहुंचे थे, जबकि कई अपने साथियों के साथ नारे लगा रहे थे. पूरे चौक में "इंकलाब जिंदाबाद", "हम जीत गए" और "छात्र एकता जिंदाबाद" जैसे नारे लगातार गूंजते रहे. इसी दौरान फैज अहमद फैज की मशहूर नज्म भी गाई गई, जिसने पूरे माहौल को और जोशीला बना दिया.
जश्न की शुरुआत छात्रों ने राष्ट्रगान गाकर की. सभी छात्र एक साथ खड़े हुए और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान गाया. इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया. मिठाइयां और बिस्कुट बांटे गए. ढोल की थाप पर छात्र देर तक नाचते रहे और अपनी खुशी का इजहार करते रहे. चौक पर मौजूद राहगीर भी इस दृश्य को देखने के लिए रुक गए. कई लोगों ने छात्रों के संघर्ष और उनकी एकजुटता की सराहना की.
इस दौरान छात्रों ने THE News Post की टीम से बातचीत करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे की बात नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में जनता और खासकर छात्रों की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण है. छात्रों ने कहा, "हमने सरकार को दिखा दिया है कि जवाबदेही तय करनी ही पड़ेगी. अगर छात्र एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं तो सरकार को भी उनकी बात सुननी पड़ती है."
छात्रों ने आगे कहा कि यह आंदोलन आने वाले वर्षों में देश के सबसे महत्वपूर्ण छात्र आंदोलनों में गिना जाएगा. उनका कहना था कि इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध और एकता के दम पर बड़े से बड़ा फैसला भी बदला जा सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब जो भी नया शिक्षा मंत्री बनेगा, वह छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देगा, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा और ऐसे फैसले करेगा जो विद्यार्थियों के हित में हों. छात्रों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं था, बल्कि बेहतर और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था के लिए था.
अल्बर्ट एक्का चौक पहले भी कई ऐतिहासिक आंदोलनों और प्रदर्शनों का गवाह रहा है, लेकिन इस दिन का माहौल अलग था. हर तरफ जीत की खुशी, उम्मीद और लोकतंत्र पर भरोसे की झलक दिखाई दे रही थी. छात्र एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे थे, नारे लगा रहे थे और अपने संघर्ष को याद कर रहे थे. उनके चेहरों पर यह विश्वास साफ दिखाई दे रहा था कि जब जनता एकजुट होकर अपनी बात रखती है, तो उसकी आवाज अनसुनी नहीं की जा सकती. यही वजह है कि रांची का अल्बर्ट एक्का चौक इस ऐतिहासिक दिन का साक्षी बन गया, जिसे छात्र लंबे समय तक याद रखने की बात कह रहे हैं.
