रांची(RANCHI): विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध अब सदन परिसर तक पहुंच गया है. छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मांडू विधायक तिवारी महतो ने एक बार फिर विधानसभा परिसर के बाहर सड़क पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया. विधायक ने इस दौरान सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह से पुलिस ने कार्रवाई की, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. विधायक के मुताबिक, अपनी बात रखने वाले युवाओं पर बल प्रयोग करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और उनके साथ संवाद स्थापित करने की अपील की.
तिवारी महतो ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन को लाठी के बल पर रोकने की कोशिश करना सरकार की कथित तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है. विधायक ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में सरकार को उनके साथ बातचीत करनी चाहिए थी और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में पहल करनी चाहिए थी. उन्होंने छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन को बलपूर्वक दबाना उचित नहीं है. विधायक ने सरकार से छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की.
विधायक ने विधानसभा परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार से छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई. तिवारी महतो ने कहा कि आंदोलनकारी छात्रों के साथ हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के आंदोलनों को इस तरह दबाने की कोशिश न हो. उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की. छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा अब विधानसभा परिसर में भी राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है.
