रांची: ओरमांझी स्थित कलकत्ता पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को वार्षिक मॉडल प्रदर्शनी 'मंथन 2026' का भव्य आयोजन किया गया. प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विज्ञान, गणित, साहित्य, वाणिज्य, मानविकी और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों को रचनात्मक और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करना था. कार्यक्रम में प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के विद्यार्थियों ने अपनी आयु और क्षमता के अनुरूप तैयार किए गए मॉडलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनी में सबसे पहले प्री-प्राइमरी के नन्हे-मुन्ने बच्चों की रचनात्मकता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने 100 से अधिक हस्तशिल्प सामग्री तैयार की, जिनमें सजावटी गुलदस्ते, कलात्मक बर्तन, पारंपरिक छठ पूजा का सूप, विभिन्न सजावटी वस्तुएं और अन्य हस्तनिर्मित कलाकृतियां शामिल थीं. इन मॉडलों का उद्देश्य बच्चों में कल्पनाशीलता, रचनात्मक सोच और हस्तकला के प्रति रुचि विकसित करना था.
प्राइमरी, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी वर्ग के विद्यार्थियों ने मिलकर लगभग 225 मॉडल प्रस्तुत किए. अंग्रेजी विषय में विद्यार्थियों ने नाउन, प्रोनाउन, पार्ट्स ऑफ स्पीच, एडवर्ब और अन्य व्याकरणिक अवधारणाओं को त्रिआयामी मॉडलों के जरिए समझाया. साहित्य अनुभाग में प्रसिद्ध कवियों और लेखकों की रचनाओं को आकर्षक मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया गया, जिससे भाषा और साहित्य को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जा सके.
गणित विभाग की ओर से अंकों की उत्पत्ति, गणितीय सूत्र, बीजगणित, त्रिकोणमिति और ज्यामिति जैसी जटिल अवधारणाओं को सरल और दृश्य रूप में समझाने का प्रयास किया गया. वहीं हिंदी और संस्कृत विभाग के विद्यार्थियों ने व्याकरण, रामायण और महाभारत काल की वंशावली तथा अन्य साहित्यिक विषयों को मॉडलों के माध्यम से प्रदर्शित किया.
विज्ञान अनुभाग प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहा. विद्यार्थियों ने सौर मंडल, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, अमावस्या, पूर्णिमा और आकाशगंगा का इलेक्ट्रॉनिक मॉडल तैयार कर उनकी कार्यप्रणाली को समझाया. सीनियर वर्ग के छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए, जिनमें उद्योगों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और धूलकणों को नियंत्रित कर अम्लीय वर्षा रोकने की तकनीक दिखाई गई.
इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन, सीरीज और समानांतर विद्युत संयोजन, सेंसर आधारित डस्टबिन, स्मार्ट हेलमेट, रिमोट एवं वॉयस कंट्रोल वाहन, अणु की संरचना, इसरो के रॉकेट प्रक्षेपण और मानव शरीर के विभिन्न अंगों जैसे हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े, किडनी, पाचन, श्वसन एवं रक्त संचार तंत्र के कार्यों को भी मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया.
वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों ने वस्तु विनिमय प्रणाली से लेकर आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था, जीएसटी, शेयर बाजार, पूंजीगत संपत्ति और देनदारियों जैसे विषयों को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया. वहीं मानविकी के विद्यार्थियों ने मेसोपोटामिया और सिंधु घाटी सभ्यता, प्राचीन कृषि उपकरण, हथियार, मुद्राएं और ऐतिहासिक विकास यात्रा को मॉडलों के जरिए प्रदर्शित किया. साथ ही मानविकी विषयों में उपलब्ध करियर के अवसरों की भी जानकारी दी गई.
प्रदर्शनी में भारतीय संस्कृति पर आधारित मॉडल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे. विद्यार्थियों ने भारत के चार धाम—बद्रीनाथ, द्वारका, जनकपुरी और रामेश्वरम—का मॉडल तैयार किया. इसके अलावा विभिन्न खाद्य पदार्थों की उत्पत्ति और उनके भारत तक पहुंचने की ऐतिहासिक यात्रा को भी रोचक ढंग से प्रदर्शित किया गया.
पूरे कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय की प्राचार्या प्रियम्दा झा और निदेशक मिथिलेश कुमार मिश्र के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मौजूद रहे. प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, रचनात्मक क्षमता और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी समझ की सराहना की गई. आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में नवाचार, शोध की भावना और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
