Jharkhand

राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर! संख्या बल कम होने के बावजूद एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत, महागठबंधन में मची हलचल

Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर
राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर! संख्या बल कम होने के बावजूद एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत, महागठबंधन में मची हलचल

रांची(RANCHI): झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुआ चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ.  नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है क्योंकि संख्या बल के हिसाब से पीछे माने जा रहे एनडीए समर्थित उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया.  इस परिणाम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है.

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत हासिल कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है.  नाथवानी को कुल 30 वोट मिले, हालांकि इनमें दो वोट अमान्य घोषित हुए और उन्हें 28 वैध मत प्राप्त हुए.  गौरतलब है कि एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे, इसके बावजूद उनकी जीत ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए.

वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले.  दूसरी ओर झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम को 31 वोट मिले, लेकिन एक वोट अमान्य होने के कारण उन्हें 30 वैध मत प्राप्त हुए.  महागठबंधन में झामुमो, कांग्रेस, राजद और माले समेत सहयोगी दलों के कुल 56 विधायक होने के बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

नतीजों के बाद झारखंड विधानसभा परिसर में एनडीए कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला.  समर्थकों और विधायकों ने परिमल नाथवानी को मिठाइयां खिलाईं, फूल-मालाएं पहनाईं और जीत का जश्न मनाया.   नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा झारखंड के विधायक समझदार हैं और उन्हें पता है कि राज्यहित में किसे वोट देना है.  यही वजह है कि परिमल नाथवानी की जीत हुई.  वे पहले भी दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और झारखंड में कई विकास कार्यों से जुड़े रहे हैं.

उधर हार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई.  कांग्रेस विधायक सुरेश बैठा ने आरोप लगाया कि उन्हें सहयोगी दलों की ओर से धोखा मिला.  उन्होंने कहा कि राजद और माले के विधायकों ने साथ नहीं दिया.  वहीं कांग्रेस विधायक ममता देवी ने आरोप लगाया कि एनडीए ने धनबल का इस्तेमाल किया.  उनका कहना था कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट थे, लेकिन विपक्षी खेमे ने जीत के लिए पैसे की ताकत का सहारा लिया.

झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति में केवल संख्या बल ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि रणनीति और अंदरूनी समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.  एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत ने जहां महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं.  यह चुनाव अब सिर्फ एक जीत-हार नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है.