रांची (RANCHI): JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े मामले में जेल में बंद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर बुधवार को CID की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने CID और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सभी पक्षों की बहस पूरी कर ली. इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अब आरोपियों को जमानत मिलेगी या जेल में ही रहना होगा, इस पर अदालत के आदेश का इंतजार है. इस मामले में एल ख्यांग्ते के अलावा कथित मास्टरमाइंड और प्रमुख आरोपी अभय तिवारी, सौरभ सुमन और अरविंद कुमार की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई. सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं.
एल ख्यांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत में पक्ष रखा. बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि ख्यांग्ते के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं हैं. अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी की छापेमारी के दौरान उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई. बचाव पक्ष ने उनकी गिरफ्तारी को भी चुनौती दी और इसे अवैध बताते हुए जमानत देने की मांग की. अन्य आरोपियों की ओर से भी जमानत के पक्ष में दलीलें रखी गईं.
वहीं, CID ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया. जांच एजेंसी ने अदालत के सामने मामले की गंभीरता और आरोपियों की कथित भूमिका का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने का आग्रह किया. CID का आरोप है कि JPSC की परीक्षाओं के आयोजन का काम TDPL को सौंपने की प्रक्रिया में एल ख्यांग्ते की भूमिका रही थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने के बावजूद कथित तौर पर उचित कार्रवाई नहीं की गई. CID की जांच में ख्यांग्ते पर TDPL से कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप भी लगाया गया है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत और जांच की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा.
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान CID की ओर से अदालत में करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की गई थी. जांच एजेंसी का दावा है कि केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य दर्ज हैं. CID इसी केस डायरी और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों की जमानत का विरोध कर रही है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. एल ख्यांग्ते करीब एक वर्ष तक JPSC के अध्यक्ष पद पर रहे थे. इसी दौरान JPSC की कई परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अब जांच चल रही है. मामले में JPSC की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है. CID के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में परीक्षा आयोजन से जुड़ी प्रक्रिया, एजेंसी के चयन और कथित अनियमितताओं के अलग-अलग पहलुओं की जांच की जा रही है.
मामले के प्रमुख आरोपी अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान को भी CID की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकारियों के समक्ष दिए गए बयान में अभय तिवारी ने एल ख्यांग्ते की कथित भूमिका का जिक्र किया है. CID का दावा है कि TDPL को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयनित किए जाने की प्रक्रिया में ख्यांग्ते की अहम भूमिका थी. इसके अलावा अभय तिवारी और उसके परिवार के कई सदस्यों को JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं के जरिए नियुक्तियां मिलने की बात भी जांच में सामने आई है.
CID ने JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है. जांच के दौरान अब तक 24 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एल ख्यांग्ते को CID ने 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई और रिमांड अवधि पूरी होने के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं. अब चारों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट का अगला आदेश इस मामले में आरोपियों की आगे की कानूनी स्थिति तय करेगा.
