Jharkhand

शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन! 3 साल से एक ही दफ्तर में जमे लिपिकों का होगा तबादला, 15 दिन में मांगी गई रिपोर्ट

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने क्षेत्रीय और जिला शिक्षा कार्यालयों में लंबे समय से पदस्थापित लिपिकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एक ही कार्यालय में तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत लिपिकों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए. इसके साथ ही वर्षों से एक ही जिले में जमे कर्मचारियों को भी प्रमंडल के अन्य जिलों में भेजने का फैसला लिया गया है.

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न शिक्षा कार्यालयों में कार्यरत लिपिकों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इनमें अनियमितता, पक्षपातपूर्ण कार्यशैली और लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने जैसे आरोप शामिल हैं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने तबादला नीति को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है. निदेशालय का कहना है कि कई मामलों में कर्मचारियों का तबादला होने के बाद भी उन्हें दोबारा उसी कार्यालय में पदस्थापित कर दिया जाता है या प्रतिनियुक्ति के नाम पर वापस भेज दिया जाता है. विभाग ने ऐसी व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

क्या हैं नए नियम?
•    एक ही कार्यालय में लगातार 3 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत लिपिकों का तत्काल तबादला किया जाएगा. 
•    पिछले 12 वर्षों में यदि कोई कर्मचारी कुल 8 वर्ष या उससे अधिक समय तक एक ही जिले में रहा है, तो उसे प्रमंडल के दूसरे जिले में भेजा जाएगा. 
•    लगातार 6 वर्ष से एक ही जिले में पदस्थापित कर्मचारियों का भी स्थानांतरण किया जाएगा. 
•    किसी कर्मचारी को उसी कार्यालय में प्रतिनियुक्त नहीं किया जाएगा, जहां उसकी कुल सेवा अवधि 3 वर्ष या उससे अधिक रही हो. 

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी विशेष परिस्थिति में यदि किसी कर्मचारी को उसके पुराने कार्यालय में प्रतिनियुक्त करना आवश्यक हो, तो इसके लिए पहले निदेशालय से अनुमति लेनी होगी. बिना अनुमति ऐसी पोस्टिंग मान्य नहीं होगी. शिक्षा विभाग ने सभी क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करें और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट निदेशालय को उपलब्ध कराएं. विभाग का मानना है कि इस कदम से शिक्षा कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा.