Jharkhand

झारखंड के जेल में बड़ा बदलाव, कैदियों को बाहर जाकर काम करने की मिलेगी छूट

Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
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रांची (RANCHI): झारखंड में जेल सुधार की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है. राज्य सरकार चुनिंदा कैदियों को दिन के समय जेल से बाहर जाकर काम करने और अपनी आजीविका कमाने की अनुमति देने की तैयारी में है. काम पूरा होने के बाद उन्हें शाम को वापस जेल लौटना होगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों को जिम्मेदार जीवन के लिए तैयार करना और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती चरण में यह व्यवस्था राज्य की चार सेंट्रल जेलों में लागू की जाएगी. इनमें रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, हजारीबाग की जय प्रकाश नारायण सेंट्रल जेल, पूर्वी सिंहभूम की घाघीडीह सेंट्रल जेल और दुमका सेंट्रल जेल शामिल हैं. इन जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक तैयार करने के लिए बैरक और सेल की पहचान भी की जा चुकी है.

आईजी जेल सुदर्शन मंडल के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत पात्र कैदियों को सुबह करीब 6 या 7 बजे जेल से बाहर निकलकर काम करने की अनुमति दी जा सकती है. उन्हें दिनभर काम करने के बाद लगभग 12 घंटे के भीतर जेल वापस लौटना होगा. चूंकि संबंधित जेलें शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए कैदियों को रोजगार और कमाई के विभिन्न अवसर मिलने की संभावना है.

इस योजना के लिए कैदियों के चयन को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार किया जाएगा. इसमें यह तय किया जाएगा कि किन कैदियों को ओपन या सेमी-ओपन बैरक की सुविधा दी जा सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, कैदी का अच्छा आचरण और जेल के नियमों का पालन इस चयन में अहम भूमिका निभाएगा.

यह पहल राज्य में जेल सुधार कार्यक्रम का हिस्सा है. हाल ही में झारखंड कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. झारखंड जेल और सुधार सेवा अधिनियम, 2025 में भी ओपन सुधार संस्थान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है.

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ‘सुहास चकमा बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निर्देशों के बाद लिया गया है. शीर्ष अदालत ने राज्यों से ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन की व्यवस्था शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा था. जहां अलग संस्थान बनाना संभव न हो, वहां मौजूदा जेल परिसरों में ओपन या सेमी-ओपन बैरक बनाने का सुझाव दिया गया था.