Jharkhand

झारखंड में करम पर्व की धूम, पारंपरिक गीतों पर झूमीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

रांची (RANCHI): देशभर में आज करम पर्व की धूम देखने को मिल रही है, लेकिन झारखंड में इसकी रौनक कुछ अलग ही नजर आ रही है. राजधानी रांची से लेकर राज्य के अलग-अलग इलाकों में लोग पूरे उत्साह के साथ इस पारंपरिक पर्व को मना रहे हैं.

रांची में सुबह से ही करम पर्व का रंग दिखाई देने लगा. कहीं लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए तो कहीं मांदर और दूसरे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन सुनाई दी. युवा और महिलाएं पारंपरिक गीतों पर एक साथ नाचते और करम पर्व की खुशियां मनाते दिखाई दिए.

रामदयाल मुंडा अखड़ा में दिखी करम की रौनक

रांची स्थित डॉ. रामदयाल मुंडा अखड़ा में मंगलवार को करम पर्व को लेकर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी शामिल हुईं.

इस दौरान मंत्री भी करम के रंग में रंगी नजर आईं. उन्होंने लोगों के साथ पारंपरिक गीतों और मांदर की धुन पर नृत्य किया और करम पर्व की खुशियां साझा कीं.

प्रकृति और इंसान के रिश्ते का पर्व है करम

कार्यक्रम के दौरान शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि करम पर्व केवल झारखंड तक सीमित नहीं है. इसे देश के कई आदिवासी बहुल इलाकों में भी मनाया जाता है.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ सदियों पुराना रिश्ता रहा है. करम की डाल केवल किसी पेड़ की शाखा नहीं, बल्कि प्रकृति, पुरखों और इंसान के बीच जुड़ाव का प्रतीक है.

उन्होंने कहा कि करम को सिर्फ धार्मिक नजरिए से देखने के बजाय पुरखों से मिली परंपरा के रूप में समझना चाहिए. आदिवासी समाज की जीवनशैली और उसके पारंपरिक ज्ञान से भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.

शाम को होगी करम पूजा

दिनभर गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्य के बाद शाम को करम पूजा की जाएगी. लोग विधि-विधान के साथ करम डाल की पूजा करेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे. इसके साथ ही अलग-अलग अखड़ों और इलाकों में देर रात तक करम के पारंपरिक गीत और नृत्य का दौर देखने को मिलेगा.