Jharkhand

आखिर कितना बड़ा है JSSC-JPSC घोटाले का नेटवर्क? अभय तिवारी के बाद ‘गुरु’ मिथिलेश सिंह का नाम आया सामने

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा माफिया के कथित नेटवर्क की नई परतें खुलने लगी हैं. जांच से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आए बयानों में परीक्षा में सेटिंग, प्रश्न-पत्र लीक, OMR में छेड़छाड़ और अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा पास कराने जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र है. अब इस पूरे मामले में ICN India के निदेशक मिथिलेश सिंह का नाम सामने आने से जांच का दायरा और बड़ा होता दिख रहा है. उपलब्ध दस्तावेजों में मिथिलेश सिंह को आरोपी अभय तिवारी का कथित ‘गुरु’ बताया गया है. दस्तावेजों में दावा किया गया है कि दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क था और उनका नेटवर्क सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था. कथित नेटवर्क के बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों तक फैले होने का भी दावा किया गया है. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

इस मामले में आरोपी अभय तिवारी के CID के समक्ष कथित कबूलनामे ने परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के कई गंभीर दावे सामने रखे थे. उसके बयान के अनुसार, उसने खुद अजय संग्राम नाम के व्यक्ति से कथित सेटिंग कराकर PGTTCE 2023 में अंग्रेजी विषय की परीक्षा पास की थी. इसके बाद उसकी पोस्टिंग देवघर में हुई. कथित कबूलनामे में कॉमर्स विषय के अभ्यर्थी सुनील कुमार का भी जिक्र किया गया है. आरोप है कि उसने भी इसी तरह परीक्षा में सफलता हासिल की. बयान में दावा किया गया कि परीक्षा पास कराने के लिए पहले से ही कुछ परीक्षा केंद्रों को कथित तौर पर मैनेज किया जाता था.

जांच में सामने आए दावों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा परीक्षा के दौरान रिमोट एक्सेस से जुड़ा है. आरोपी के अनुसार, कथित तौर पर सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को ऐसे कंप्यूटर पर बैठाया जाता था, जिनका रिमोट एक्सेस दूसरे कमरे में बैठे सॉल्वर के पास रहता था. अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर के सामने बैठे रहते थे, जबकि दूसरे स्थान पर मौजूद सॉल्वर कथित तौर पर सवालों के जवाब हल करते थे. इस तरह तकनीक का इस्तेमाल परीक्षा में अनुचित तरीके से मदद पहुंचाने के लिए किए जाने का आरोप है. इतना ही नहीं, आरोपी के बयान में यह भी दावा किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले खास संकेत दिए जाते थे. उन्हें निर्धारित रंग के कपड़े पहनने और एक विशेष लाइन में खड़े होने के लिए कहा जाता था, ताकि केंद्र पर मौजूद लोग उन्हें पहचान सकें.

इसी बीच ICN India के निदेशक मिथिलेश सिंह को पकड़े जाने की चर्चा ने मामले को और गरमा दिया है. सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, उन्हें सादे कपड़ों में चार लोगों की टीम द्वारा पकड़े जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस कथित गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि अभी तक CID की ओर से नहीं की गई है. जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी से इनकार किया है. ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मिथिलेश सिंह वास्तव में हिरासत में हैं या नहीं. उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.

उपलब्ध दस्तावेजों में मिथिलेश सिंह पर प्रश्न-पत्र लीक कराने, OMR में कथित छेड़छाड़ कराने और पैसे लेकर अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दस्तावेजों में यह दावा भी किया गया है कि कथित नेटवर्क लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बनाता रहा. अगर जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल झारखंड की कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई राज्यों में फैले कथित परीक्षा नेटवर्क की जांच का रास्ता खुल सकता है.

PGTTCE 2023 के तहत झारखंड में 3,120 पदों पर भर्ती हुई थी. कंप्यूटर आधारित परीक्षा 18 अगस्त से 10 सितंबर 2023 के बीच आयोजित की गई थी. इसके बाद 22 दिसंबर 2023 और 1 मार्च 2024 को परिणाम जारी किए गए और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी. लेकिन 29 जनवरी 2024 को नामकुम थाने में कथित पेपर लीक को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद परीक्षा की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई. मामले में IPC की धारा 467, 468, 420 और 120(B), IT Act की धारा 66 और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई.

PGTTCE 2023 की परीक्षा कराने वाली चेन्नई की एजेंसी सत्वत इन्फोसोल प्राइवेट लिमिटेड पर भी कार्रवाई हुई थी. बताया गया कि इसी एजेंसी ने JSSC CGL, लैब असिस्टेंट और म्युनिसिपल परीक्षाओं का आयोजन भी किया था. 12 फरवरी 2024 को एजेंसी को समन भेजे जाने के बाद उसे डिबार किए जाने की जानकारी सामने आई थी. अब अभय तिवारी के कथित बयान, मिथिलेश सिंह से जुड़े दस्तावेज और कई राज्यों तक नेटवर्क फैले होने के दावों ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या वास्तव में परीक्षा माफिया का यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था? इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे? कितनी परीक्षाओं को निशाना बनाया गया और कितने अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाया गया? इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है.