Jharkhand

JSSC/JPSC विवाद: कौन है पावरफुल कुंदन कुमार, जिसपर 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का लगा आरोप

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षा पास कर पद हासिल करने वालों की योग्यता पर अब एक के बाद एक सवाल उठ रहे हैं. JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम और नए आरोप सामने आ रहे हैं. अब जांच एजेंसी को मिली एक जानकारी में दावा किया गया है कि कुंदन कुमार नाम के अभ्यर्थी ने कथित सेटिंग के जरिए JSSC-CGL परीक्षा में सफलता हासिल की और अपने भाई समेत 20 से अधिक अभ्यर्थियों को भी सरकारी नौकरी दिलाने में भूमिका निभाई. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और CID पूरे मामले की पड़ताल कर रही है.

मिथिलेश सिंह के जरिए सेटिंग कराने का दावा
CID की जांच में यह जानकारी सामने आई है कि कुंदन कुमार ने JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मास्टरमाइंड बताए जा रहे मिथिलेश सिंह के जरिए परीक्षा में सेटिंग कराई थी. दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ. जांच एजेंसी अब इस दावे से जुड़े आर्थिक लेन-देन, अभ्यर्थियों के संपर्क और परीक्षा में उनकी सफलता के तरीकों की जानकारी जुटाने में लगी है. बताया जा रहा है कि जांच के दौरान CID को एक पत्र मिला है, जिसमें कुंदन कुमार से कथित तौर पर जुड़े कई अभ्यर्थियों के नाम का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि इन लोगों ने भी JSSC-CGL परीक्षा में कथित तरीके से सफलता हासिल की और वर्तमान में अलग-अलग सरकारी पदों पर काम कर रहे हैं.

20 से ज्यादा अभ्यर्थियों की ‘सेटिंग’ का आरोप
सूत्रों का दावा है कि कुंदन कुमार पर 20 से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा में सेटिंग कराने का आरोप है. इनमें से कुछ अभ्यर्थी परीक्षा में सफल होने के बाद सरकारी सेवा में योगदान भी दे चुके हैं. अब CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन अभ्यर्थियों का कुंदन कुमार से वास्तव में कोई संपर्क था या नहीं और उनकी सफलता में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं. CID को मिले पत्र में कुछ नामों का भी जिक्र होने की बात सामने आई है. इनमें रवि ... नाम का एक व्यक्ति बताया जा रहा है, जो वर्तमान में रांची के एक सरकारी विभाग में पदस्थापित है. इसके अलावा विकास कुमार के बारे में बताया गया है कि वह BSO के पद पर कार्यरत है, जबकि धर्मेंद्र कुमार के LEO पद पर काम करने की जानकारी दी गई है. पत्र में इन अभ्यर्थियों की JSSC-CGL में सफलता और कुंदन कुमार से उनके कथित संबंधों की जांच करने का अनुरोध किया गया है.

मामले में सबसे गंभीर आरोप कुंदन कुमार के अपने भाई को लेकर है. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, CID को मिली जानकारी में दावा किया गया है कि कुंदन कुमार ने कथित सेटिंग के जरिए अपने भाई को JSSC की परीक्षा में जूनियर इंजीनियर (JE) की नौकरी दिलाने में भी भूमिका निभाई. बताया जा रहा है कि उसका भाई फिलहाल गढ़वा में सरकारी सेवा में कार्यरत है. अब CID इस पहलू की भी जांच कर रही है कि भाई ने किस परीक्षा के जरिए JE पद हासिल किया, उसकी चयन प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं और क्या उसका संबंध कथित परीक्षा सेटिंग से था.

JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा करीब 150 अभ्यर्थियों और संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है. जांच एजेंसी परीक्षा में कथित पेपर लीक, सेटिंग, पैसों के लेन-देन और सफल अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. फिलहाल कुंदन कुमार और पत्र में बताए गए अन्य अभ्यर्थियों पर लगे आरोप जांच के दायरे में हैं. CID की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में परीक्षा में पैसे और सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को सफलता दिलाई गई थी.