रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही जांच के बीच CID की पूछताछ में एक और गंभीर दावा सामने आया है. जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा एजेंसी TDPL के JSSC में इंपैनलमेंट को लेकर उसके मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने कई अहम जानकारियां दी हैं. पूछताछ में अभय ने कथित तौर पर दावा किया कि TDPL को JSSC में इंपैनल कराने के लिए एक एसओ को 5 लाख रुपये नकद दिए गए थे. इसके बाद कंपनी को परीक्षा संचालन से जुड़े काम मिलने का रास्ता साफ हुआ.
CID के सामने दिए गए कथित बयान के मुताबिक, अभय तिवारी ने बताया कि TDPL को JSSC में काम दिलाने की प्रक्रिया में प्रेम कुमार नाम के एक एसओ की भूमिका थी. अभय का दावा है कि प्रेम कुमार की मदद से कंपनी का JSSC में इंपैनलमेंट कराया गया. अभय के अनुसार, इस काम के बदले कुल 10 लाख रुपये की रकम उसे दी गई थी. इसमें से 5 लाख रुपये उसने अपने पास रखे, जबकि बाकी 5 लाख रुपये कथित तौर पर प्रेम कुमार को दिए गए. अभय ने जांच एजेंसी को बताया कि यह रकम JSSC कार्यालय के सामने स्थित मैदान में नकद दी गई थी. हालांकि, ये सभी बातें जांच के दौरान आरोपी की ओर से दिए गए कथित बयान पर आधारित हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या न्यायिक रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है.
पूछताछ में अभय ने अपने पुराने कामकाज को लेकर भी जानकारी दी. उसके मुताबिक, वर्ष 2023 में उसने JSR एजेंसी के साथ प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर के तौर पर काम शुरू किया था. इस एजेंसी को स्वास्थ्य विभाग में इंपैनल कराने और अनुबंध आधारित भर्ती से जुड़े काम दिलाने में उसकी भूमिका होने का दावा किया गया है. अभय के कथित बयान के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस काम के एवज में उसे करीब 9 लाख रुपये मिले थे. इसके बाद उसकी गतिविधियां परीक्षा और भर्ती से जुड़े दूसरे कामों की ओर बढ़ीं.
अभय ने CID को कथित तौर पर बताया कि बाद में दिल्ली निवासी शेंटी के माध्यम से उसका संपर्क TDPL से हुआ. इसके बाद JSSC में कंपनी का इंपैनलमेंट कराने और काम दिलाने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका बनी. जांच के दौरान TDPL के निदेशक रामवीर सिंह से भी पूछताछ की गई. रामवीर सिंह ने भी कथित तौर पर अभय की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि JSSC में TDPL को काम दिलाने में अभय ने मदद की थी. CID अब दोनों आरोपियों के बयानों और सामने आए तथ्यों का मिलान कर रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि TDPL के इंपैनलमेंट की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी और कंपनी को काम दिलाने के लिए नियमों का पालन हुआ था या नहीं.
जांच के दौरान TDPL को लेकर एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि JSSC ने वर्ष 2025 में कंपनी को प्रतिबंधित कर दिया था. अब CID की जांच का दायरा इस बात तक पहुंच गया है कि कंपनी को इससे पहले किस प्रक्रिया के तहत JSSC में इंपैनल किया गया और उसे परीक्षा संचालन से जुड़े काम कैसे मिले. जांच एजेंसी TDPL से जुड़े वित्तीय लेनदेन, इंपैनलमेंट प्रक्रिया और अलग-अलग अधिकारियों तथा बिचौलियों से संभावित संपर्क की भी पड़ताल कर रही है.
JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में CID ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और निदेशक रामवीर सिंह को गिरफ्तार किया है. दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. अब जांच एजेंसी अभय के कथित 5 लाख रुपये के भुगतान वाले दावे समेत अन्य आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है. आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है.
