रांची (RANCHI): झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी (JPSC-JSSC) परीक्षा विवाद अब सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ता जा रहा है. दो दिन पहले जहां जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक्स (X) पर अभियान चलाया था, वहीं अब जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल में चयनित अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य और नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है.
बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों ने #JSSC_CGL_चयनितों_के_साथ_न्याय_करो हैशटैग के साथ पोस्ट किए. इन पोस्ट के जरिए अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इसकी कीमत उन अभ्यर्थियों को नहीं चुकानी चाहिए, जिन्होंने वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद अपनी जगह बनाई है. अभ्यर्थियों के पोस्ट में बार-बार एक ही सवाल सामने आ रहा है “अगर गलती किसी और ने की है, तो सजा मेहनत से चयनित होने वालों को क्यों?”
सोशल मीडिया अभियान में कई चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी बात को प्रभावी ढंग से सामने रखने के लिए AI से तैयार तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया है. इन तस्वीरों के जरिए कोई वर्षों की तैयारी और संघर्ष दिखा रहा है, तो कोई यह बता रहा है कि सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए कई अभ्यर्थियों ने निजी नौकरी तक छोड़ दी. पोस्ट में परिवार की उम्मीदों, आर्थिक और मानसिक संघर्ष के साथ उस लंबे इंतजार का भी जिक्र किया जा रहा है, जिसके बाद अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी में चयन की खुशी मिली. एक यूजर Thinkworld ने लिखा कि सरकारी नौकरी हासिल करने के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और त्याग होता है. उन्होंने कहा कि जो लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन मेहनत और संघर्ष के दम पर सफलता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के साथ भी न्याय होना चाहिए.
JPSC-JSSC विवाद के बीच अब मामला दो अलग-अलग मांगों के बीच फंसता नजर आ रहा है. एक ओर परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है. वहीं दूसरी ओर चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवाज उठा रहे हैं. चयनित अभ्यर्थियों के अभियान का संदेश भी स्पष्ट है- दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य बर्बाद न किया जाए. यही वजह है कि JPSC-JSSC विवाद अब सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. जांच और सुधार की मांगों पर कार्रवाई होती है तो उसके दायरे में चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य भी प्रभावित होने की चिंता है. वहीं नियुक्तियों को रद्द या प्रभावित करने की स्थिति में उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय का सवाल उठ रहा है, जो अपनी मेहनत के दम पर चयनित होने का दावा कर रहे हैं. फिलहाल सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की आवाज तेज हो रही है और पूरा विवाद अब सिर्फ परीक्षा सुधार या जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हजारों चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी और भविष्य का सवाल भी बन गया है.
