रांची (RANCHI): नीति आयोग ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के तहत पहली बार इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 जारी किया है, जिसमें झारखंड और बिहार को निवेश आकर्षित करने के मामले में 'इमर्जिंग' राज्यों की श्रेणी में रखा गया है. 17 बड़े राज्यों की सूची में झारखंड को 16वां स्थान मिला है और उसका कुल स्कोर 41.3 रहा. इस सूची में केवल बिहार ही झारखंड से नीचे है. वहीं, देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर झारखंड 25वें स्थान पर रहा. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के पास खनिज संपदा और औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन निवेश के मोर्चे पर अभी भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं हो पाया है.
रिपोर्ट के अनुसार झारखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्राकृतिक संपदा और मजबूत वित्तीय स्थिति है. राज्य को कोयला और लिग्नाइट उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिला है, जबकि कम ब्याज भुगतान के कारण वित्तीय स्थिति भी सकारात्मक मानी गई है. हालांकि, निवेशकों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करने में राज्य पीछे रह गया है. रिपोर्ट में बिजनेस क्लाइमेट को झारखंड की सबसे कमजोर कड़ी बताया गया है. वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य में केवल 0.06 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया, जो निवेश आकर्षित करने की सीमित क्षमता को दर्शाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड की अर्थव्यवस्था में उद्योग की हिस्सेदारी 44.7 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र की 50 प्रतिशत और कृषि की 5.3 प्रतिशत है.
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि झारखंड को निवेश बढ़ाने के लिए बिजनेस क्लाइमेट, पारदर्शी नीतियों, तेज मंजूरी प्रक्रिया, बेहतर बुनियादी ढांचे और कुशल प्रशासन पर विशेष ध्यान देना होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल खनिज संपदा या औद्योगिक आधार होने से निवेश नहीं आएगा, बल्कि निवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद माहौल तैयार करना भी जरूरी है. बड़े राज्यों की सूची में गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शीर्ष तीन स्थानों पर रहे, जबकि समान 41.3 अंक होने के बावजूद पश्चिम बंगाल को झारखंड से ऊपर स्थान मिला. आयोग का मानना है कि यदि झारखंड इन क्षेत्रों में सुधार करता है, तो उसकी प्राकृतिक संपदा और औद्योगिक क्षमता भविष्य में बड़े निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
