रांची (RANCHI): झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत राज्य सरकार और जिला प्रशासन की कार्रवाई को गैर-कानूनी ठहराते हुए एक ट्रक मालिक के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने आदेश दिया कि पीड़ित ट्रक मालिक को 3 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और दो सप्ताह के भीतर उसका ट्रक वापस लौटाया जाए. बता दें, मामला दिसंबर 2021 का है, जब बालूमाथ पुलिस ने अशोक सिंह के हाईवा ट्रक को अवैध कोयला परिवहन के आरोप में जब्त किया था. इसके बाद फरवरी 2023 में लातेहार के उपायुक्त ने वाहन जब्त करने और उसकी नीलामी का आदेश जारी कर दिया. 8 मार्च 2023 को ट्रक की नीलामी भी कर दी गई, जबकि कानून के अनुसार वाहन मालिक को जब्ती आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने के लिए 60 दिनों का समय प्राप्त था.
याचिकाकर्ता अशोक सिंह ने 22 मार्च 2023 को निर्धारित समय-सीमा के भीतर खान आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की. मई 2025 में खान आयुक्त ने अपने फैसले में माना कि जब्ती आदेश ऐसे प्राधिकारी द्वारा पारित किया गया था जिसे इसका अधिकार ही नहीं था. साथ ही रॉयल्टी और जुर्माना जमा करने के बाद ट्रक छोड़ने का आदेश भी दिया गया. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जिला प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना जल्दबाजी में वाहन की नीलामी कर दी. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समाचार पत्र में प्रकाशित सामान्य विज्ञापन को वाहन मालिक को दिए जाने वाले व्यक्तिगत नोटिस का विकल्प नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई को गंभीर कानूनी त्रुटि बताते हुए इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना.
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि अधिकारियों की गैर-कानूनी कार्रवाई और अनावश्यक जल्दबाजी के कारण ट्रक मालिक को मानसिक, आर्थिक और कानूनी रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अधिक मुआवजे की मांग करना चाहता है तो वह सक्षम सिविल कोर्ट का रुख कर सकता है. वहीं, नीलामी में ट्रक खरीदने वाले व्यक्ति ने मरम्मत और खरीद मूल्य सहित 43 लाख रुपए का दावा किया था, लेकिन कोर्ट ने माना कि वह करीब तीन वर्षों तक वाहन का व्यावसायिक उपयोग कर चुका है और उसे ब्याज सहित 26.57 लाख रुपए वापस मिल चुके हैं, जो पर्याप्त है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर ट्रक वापस सौंपने और 3 लाख रुपए मुआवजा देने का सख्त निर्देश जारी करते हुए मामले का निष्पादन कर दिया.
