Jharkhand

पुराने निवेश को नया बताकर भ्रम फैला रही झारखंड सरकार, बीजेपी ने हेमंत सरकार पर बोला बड़ा हमला

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
पुराने निवेश को नया बताकर भ्रम फैला रही झारखंड सरकार, बीजेपी ने हेमंत सरकार पर बोला बड़ा हमला

रांची (RANCHI): झारखंड में निवेश को लेकर राज्य सरकार की हालिया घोषणाओं पर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर सवाल उठाए हैं. भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हाल में घोषित ₹99,639 करोड़ के निवेश प्रस्ताव वास्तव में नए नहीं हैं, बल्कि पहले घोषित परियोजनाओं को नए पैकेज के रूप में दोबारा पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार पुरानी घोषणाओं को नया बताकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है.

दावोस में घोषित निवेश को दिल्ली में फिर से पेश किया गया
प्रतुल शाह देव ने कहा कि फरवरी 2026 में दावोस और ब्रिटेन दौरे के बाद राज्य सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों का दावा किया था. उनका आरोप है कि उसी समय जिन कंपनियों के साथ एमओयू और निवेश प्रस्तावों का प्रचार किया गया था, उन्हीं कंपनियों के नाम अब दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में दोबारा नए निवेश के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं.

इन कंपनियों के नाम दोबारा शामिल करने का आरोप
भाजपा नेता ने कहा कि हालिया निवेश सूची में जिंदल स्टील लिमिटेड (₹40,000 करोड़), जिंदल न्यूक्लियर पावर (₹30,000 करोड़), रुंगटा संस (₹10,000 करोड़), रुंगटा माइंस (₹3,000 करोड़), टाटा स्टील हिसारना (₹7,000 करोड़), अमलगम स्टील एंड पावर (₹4,980 करोड़), टाटा स्टील टिन प्लेट विस्तार (₹2,600 करोड़), अंबुजा सीमेंट (₹1,000 करोड़) और जिंदल रिन्यूएबल्स (₹650 करोड़) जैसी कंपनियां शामिल हैं. उनका दावा है कि यही कंपनियां पहले घोषित निवेश प्रस्तावों में भी थीं.

प्रतुल शाह देव ने कहा कि यदि ये वास्तव में नए निवेश समझौते हैं तो सरकार स्पष्ट करे कि पहले किए गए एमओयू का क्या हुआ. वहीं यदि ये पुराने प्रस्ताव ही हैं तो उन्हें दोबारा नई उपलब्धि के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा है. उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि पिछले छह महीनों में इन परियोजनाओं पर कितना वास्तविक निवेश हुआ, कितनी जमीन आवंटित की गई, कितनी इकाइयों का निर्माण शुरू हुआ और कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला.

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता ने ₹30,000 करोड़ के जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि परमाणु ऊर्जा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है और किसी भी न्यूक्लियर प्लांट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग और संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होती है. ऐसे में उन्होंने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना इस परियोजना को निवेश सूची में शामिल कर दिया.

प्रतुल शाह देव ने कहा कि भाजपा झारखंड में आने वाले हर वास्तविक औद्योगिक निवेश का स्वागत करती है, क्योंकि इससे राज्य के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. लेकिन उन्होंने सरकार से अपील की कि वह केवल घोषणाओं और आंकड़ों के सहारे उपलब्धियां गिनाने के बजाय निवेश की वास्तविक प्रगति और धरातल पर हुए कार्यों की जानकारी जनता के सामने रखे.