रांची(RANCHI): झारखंड हाईकोर्ट की युवा अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस को जांच अधिकारी बदलने और DSP रैंक के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया है. यह सुनवाई अनुष्का के भाई देवजीत चक्रवर्ती की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर हुई. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय की बेंच में हुई.
एक सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मौजूद अधिवक्ता ने अदालत के निर्देश का पालन करने पर सहमति जताई. इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद की तारीख तय की. मृतका के परिजनों की ओर से हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार, विकास कुमार और अंशु कुमारी ने पक्ष रखा.
पति पर प्रताड़ना और हत्या का आरोप
मामला हजारीबाग के बड़ा बाजार थाना क्षेत्र की बंगाली कॉलोनी के गुप्ता कॉम्प्लेक्स के एक फ्लैट का है. इसी फ्लैट से अनुष्का का शव बरामद किया गया था. अनुष्का ने स्थानीय व्यवसायी कुशाग्र रुद्र से करीब तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था. दोनों साथ रहते थे.
अनुष्का के पिता सुनील कुमार चक्रवर्ती और बाकी परिजनों ने पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि अनुष्का को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और उसकी मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है. परिजनों ने आरोप लगाया है कि हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई.
सुसाइड नोट नहीं मिलने का दावा
याचिका में कहा गया है कि शुरुआती जांच के दौरान घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. साथ ही, फ्लैट का दरवाजा कोड लॉक से बंद होने की बात भी सामने आई है. घटना के बाद से पति के संपर्क में नहीं होने का भी दावा किया गया है.
अब DSP रैंक के अधिकारी की जांच से मामले में नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है. हालांकि, मौत की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी.