रांची (RANCHI): छात्र और युवा मुद्दों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र नेता अमीषा प्रसाद ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामलों, कथित हिरासत और राज्य में भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा. अमीषा ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले उन्हें बिना पूर्व सूचना के घर से हिरासत में लिया गया और रास्ते में प्रदर्शन से जुड़े मामले की जानकारी दी गई. उनका कहना था कि पुलिस ने एक से डेढ़ घंटे में छोड़ने की बात कही थी, लेकिन उन्हें करीब छह-सात घंटे तक हिरासत में रखा गया. उन्होंने सवाल किया कि बिना नोटिस और वारंट किसी व्यक्ति को इस तरह हिरासत में लेने का अधिकार कहां है. अमीषा ने पुलिस के उस कथित बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्हें छात्र के बजाय एक संगठन की संस्थापक बताया गया. उन्होंने कहा कि संगठन चलाने के बावजूद उनकी पढ़ाई जारी है और वह छात्र के रूप में परीक्षाएं देती रही हैं.
अमीषा प्रसाद ने पुराने स्टैम्पफोर्ड अस्पताल मामले में लगे आरोपों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने अस्पताल में न तो किसी के साथ मारपीट की और न ही तोड़फोड़ की. उन्होंने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो सार्वजनिक करने की मांग की. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और राजनीतिक व सामुदायिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को उन्हें पुराने मामले में जमानत मिल चुकी थी. अमीषा ने सदर थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग भी की, ताकि हिरासत और थाने में हुई कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने युवाओं के रोजगार और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा. अमीषा ने कहा कि राजधानी में कई युवा परिवार की मदद के लिए अलग-अलग निजी काम करने को मजबूर हैं, जबकि लंबे समय तक भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों का इंतजार उनके भविष्य पर असर डाल सकता है. उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग की. अमीषा ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को UPSC की तर्ज पर कराने पर विचार करने की बात कही. साथ ही मुख्यमंत्री से छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं के रोजगार, अधिकार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के लिए है. उन्होंने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है.
