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झारखंड में डॉक्टरों ने आंदोलन का किया ऐलान, जानिए क्यों 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन और 22 से काम बहिष्कार की दी चेतावनी

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड के डॉक्टरों से जुड़ी कई मांगों को लेकर चिकित्सा संगठनों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है. 27 सितंबर को हुई राज्य स्तरीय संयुक्त बैठक में डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों के लिए आसान नियम, जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं और आयुष्मान भारत से जुड़े मुद्दों समेत कई मांगों पर चर्चा हुई. बैठक के बाद संगठनों ने एक साझा एजेंडा तैयार किया और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की.

डॉक्टरों की सुरक्षा से लेकर अस्पतालों के नियम तक कई मांगें

चिकित्सा संगठनों की सबसे प्रमुख मांग डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर है. संगठनों ने हिंसा की घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई और Jharkhand Medical Protection Act को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को सुरक्षित माहौल मिलेगा, तभी वे बेहतर तरीके से मरीजों का इलाज कर पाएंगे.

इसके अलावा Clinical Establishment Act में भी जरूरी बदलाव की मांग की गई है. संगठनों का कहना है कि छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम पर नियमों का बोझ कम किया जाना चाहिए. 50 बेड तक की स्वास्थ्य संस्थाओं को एक्ट के दायरे से बाहर रखने और 50 से ज्यादा बेड वाले संस्थानों के लिए क्षमता के हिसाब से नियम तय करने की मांग रखी गई है.

जूनियर डॉक्टरों और सरकारी चिकित्सकों के मुद्दे भी उठे

बैठक में सरकारी डॉक्टरों के Career Progression और DACP की व्यवस्था समय पर लागू करने की मांग की गई. जूनियर डॉक्टरों के लिए समय पर बॉन्ड SR और वेतन भुगतान, मातृत्व अवकाश, दूसरी सुविधाएं और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी समस्याओं के समाधान की बात भी कही गई है. साथ ही पारदर्शी भर्ती कैलेंडर लागू करने की मांग रखी गई.

आयुष्मान भुगतान और सिंगल विंडो सिस्टम की मांग

निजी अस्पतालों से जुड़े आयुष्मान भारत और PM-JAY के भुगतान को लेकर भी डॉक्टरों ने अपनी मांग रखी है. संगठनों ने उचित पैकेज रेट, समय पर भुगतान और लंबित क्लेम के समाधान की मांग की है. अनावश्यक कटौती और क्लेम रिजेक्शन पर रोक लगाने की भी बात कही गई है.

इसके साथ ही अस्पतालों के लाइसेंस, अप्रूवल और रिन्यूअल के लिए आसान और समयबद्ध Single-Window System लागू करने की मांग की गई है.

21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन

आंदोलन के तहत 5 से 8 अक्टूबर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. 9 अक्टूबर को डॉक्टर काला बैज लगाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. 10 से 20 अक्टूबर तक जिलों में बैठक और जनसंपर्क अभियान चलेगा. इसके बाद 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.

संगठनों ने कहा है कि अगर 21 अक्टूबर तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है. डॉक्टर संगठनों ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना और डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों के हित में बेहतर व्यवस्था तैयार करना है.