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Jharkhand

श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता बनाए रखने की मांग, राज्यपाल से मिले श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जैन

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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रांची (RANCHI): झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखर जी की धार्मिक पहचान, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जैन महासभा ने राज्यपाल से पहल करने की मांग की है.सोमवार को श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के अध्यक्ष गजराज जैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रांची स्थित लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपते हुए तीर्थस्थल की धार्मिक पवित्रता, प्राकृतिक स्वरूप और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया.

जैन धर्म में बेहद खास है सम्मेद शिखर जी

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि श्री सम्मेद शिखर जी जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है. जैन मान्यताओं के अनुसार, 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया था. इसके अलावा कई सिद्धात्माओं की मोक्षस्थली भी यही पर्वतराज है. इस वजह से सम्मेद शिखर जी करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की आस्था और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है. यहां देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन और वंदना के लिए पहुंचते हैं.

सुरक्षा से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक की मांग

महासभा ने ज्ञापन के जरिए तीर्थस्थल की धार्मिक गरिमा और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि पर्वतराज और पूरे तीर्थ क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही प्रवेश मार्गों पर जांच और निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि तीर्थस्थल की सुरक्षा बनी रहे.

इसके अलावा तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम करने की मांग भी की गई. इसमें साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा सहायता और आवागमन की बेहतर सुविधाएं शामिल हैं.

राज्यपाल से भी आग्रह 

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे इस मामले में राज्य सरकार और संबंधित प्रशासन को आवश्यक निर्देश दें. महासभा चाहती है कि सम्मेद शिखर जी की धार्मिक पवित्रता, प्राकृतिक सुंदरता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग बिना किसी परेशानी के पूरी श्रद्धा के साथ तीर्थ की वंदना कर सकें.