Jharkhand

बिहार की दही चूड़ा पॉलिटिक्स पहुंची झारखंड तो कैसे कांग्रेस उम्मीदवार के साथ हो गया खेला

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

Tnp desk: बिहार में दही चूड़ा के टेबल पर राजनीति तय होती है. इस बार झारखंड में भी दही चूड़ा के टेबल पर राज्यसभा के कांग्रेस के उम्मीदवार की किस्मत तय हुई. झारखंड के परिणाम का असर कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक होगा. कांग्रेस ने सबसे पहले उम्मीदवार घोषित कर यह तय कर दिया था कि वह अपने निर्णय पर अडिग है और उम्मीदवार की जीत पक्की करने के लिए सब कुछ करेगी. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं .

वोटिंग के दिन दही चूड़ा से पॉलिटिक्स शुरू हुई और यह पॉलिटिक्स महागठबंधन के लिए शुभ नहीं रही. आरोप प्रत्यारोप का दौरा शुरू हो गया है .इसमें कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस उम्मीदवार के साथ भीतरघात हुआ है.कांग्रेस प्रभारी ने राजद और माले पर आरोप लगाया है, तो राजद और माले ने भी पलटवार किया है .मंथन शुरू है और आगे भी चलेगा. लेकिन दही चूड़ा पॉलिटिक्स ने कांग्रेस को एक बड़ा घाव दे दिया है. यह घाव आगे भरेगा या बढ़ेगा, यह आने वाले दोनों में ही पता चलेगा.

झारखंड के बाहर के लोगों का झारखंड कोटे से राज्यसभा जाने का  पुराना इतिहास रहा है. वही इतिहास 2026 में भी दोहराया गया. जो मॉक पोल में वोटिंग हुई  , वह परिणाम में नहीं बदला. परिमल नाथवानी फिर राज्यसभा में झारखंड के किंग हो गये. चार बार राज्यसभा जाने का इतिहास भी उनके नाम होगा. जिनमें तीन बार वह केवल झारखंड से ही राज्यसभा पहुंचेंगे. जानकारी के अनुसार 2020 में  आंध्र प्रदेश के कोटे से राज्यसभा गए थे. कांग्रेस को करारी हार मिली है.   परिमल नाथवानी को एनडीए समर्थन कर रहा था. कांग्रेस के प्रभारी के राजू और सह प्रभारी बेला प्रसाद की रणनीति धरी की धरी रह गई और नाथवानी ने बाजी मार ली. प्रणव झा  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार हैं. इस चुनाव में कांग्रेस आला कमान भी विशेष रुचि ले रहा था. लेकिन परिणाम तो विपरीत आया.

 अब समीक्षा होगी कि क्या खेल हुआ, जिससे एनडीए समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई. लेकिन इतना तो तय है कि झारखंड की राजनीति अब बदलेगी. महागठबंधन की  जुटता पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.