रांची (RANCHI): JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के आंदोलन को लेकर कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सरकार से पूरे मामले में गंभीरता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस सरकार में सहयोगी जरूर है, लेकिन JPSC-JSSC से जुड़े कथित घोटाले में पार्टी की कोई भूमिका नहीं है.
अंबा प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस सदन के भीतर, सदन के बाहर और संगठन के स्तर पर छात्रों की मांगों का समर्थन कर रही है. उनके मुताबिक, परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप गंभीर हैं और छात्रों की ओर से उठाई जा रही मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें अनुचित नहीं हैं और सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए.
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को बताया दुखद
आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर भी अंबा प्रसाद ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें इस बात का अफसोस है कि विधायक नहीं होने के कारण वह छात्रों की मांगों को विधानसभा के भीतर सीधे नहीं उठा पा रही हैं. हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार पूरे मामले की गंभीरता को समझेगी.
‘CID जांच पर उठ सकते हैं सवाल’
अंबा प्रसाद ने JPSC-JSSC विवाद की जांच CBI से कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल CID जांच कराने से निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा, गृह और पुलिस जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं. वहीं JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं का गठन भी सरकारी प्रक्रिया के तहत होता है. ऐसे में अगर इसी राज्य की पुलिस व्यवस्था के अधीन आने वाली एजेंसी पूरे मामले की जांच करती है, तो लोगों के मन में निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत मत है और वह पूरे मामले में पारदर्शी जांच चाहती हैं.
‘जनहित से ऊपर नहीं हो सकती राजनीति’
अंबा प्रसाद ने कहा कि राजनीति कभी भी जनता के हित से बड़ी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मजबूती के लिए Rule of Law के साथ Natural Justice के सिद्धांतों का पालन भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं या लोगों पर आरोप लगे हैं, उनसे जुड़े सरकारी तंत्र से ही जांच होने पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. ऐसे में सरकार को छात्रों की मांगों, उनके भविष्य और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए.
