रांची (RANCHI): मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को रांची में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरे. बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा मैदान से झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी CEO कार्यालय तक पैदल मार्च किया. हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लिए कार्यकर्ता नारे लगाते हुए आगे बढ़े. पार्टी ने इस प्रदर्शन का ऐलान पहले ही किया था.
CEO ऑफिस के बाहर बढ़ा हंगामा
पैदल मार्च के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता CEO कार्यालय के बाहर जमा हो गए. यहां कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के गेट की तरफ बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई.
पुलिस के रोकने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता गेट के पास ही बैठ गए और धरना शुरू कर दिया. प्रदर्शन के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया गया.
नेताओं ने CEC पर लगाए आरोप
प्रदर्शन में शामिल वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर और दूसरे नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है. पार्टी खास तौर पर SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रही है.
हालांकि, नेताओं की ओर से लगाए गए ये आरोप राजनीतिक दावे हैं. इन आरोपों पर चुनाव आयोग का अलग पक्ष है.
14 आपत्तियों की रिपोर्ट से गरमाया मामला
CEC को लेकर विवाद उस समय और चर्चा में आया, जब एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों का जिक्र किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने में आयोग के कुछ फैसलों को लेकर कई बार लिखित आपत्ति जताई थी.
इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और SIR से जुड़े कुछ फैसलों का भी जिक्र किया गया. रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC के इस्तीफे की मांग और तेज कर दी.
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के अंदर किसी मुद्दे पर चर्चा, सुझाव या आपत्ति होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग के मुताबिक SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए फैसले आयोग की सहमति से हुए हैं.