Jharkhand

SIR को लेकर मतदाताओं में भ्रम: चुनाव आयोग ने बताया किसे नहीं किया जाएगा मतदाता सूची में शामिल,पढिए पूरी जानकारी   

Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर
SIR को लेकर मतदाताओं में भ्रम: चुनाव आयोग ने बताया किसे नहीं किया जाएगा मतदाता सूची में शामिल,पढिए पूरी जानकारी   

राँची(RANCHI): झारखंड में विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण की शुरुआत 30 जून से होनी है. ऐसे में मतदाताओं के बीच कई गलत जानकारी सोशल मीडिया से फैलाई जा रही है. जिसमें दावा किया गया है कि कई मतदाता का नाम खुद से काट दिया जाएगा. और फाइनल मतदाता सूची में उन्हे नहीं शामिल किया जाएगा. यानि सीधे वह वोट देने से वंचित हो जाएंगे. इस पूरे प्रक्रिया पर अब चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कौन मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा और कौन फाइनल लिस्ट में रहेगा.  

भारत निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि कोई भी पात्र मतदाता का नाम नहीं छूटेगा. हर हार में जो भारत का नागरिक है वह वोटर लिस्ट में शामिल रहेगा. लोकतंत्र में मतदाताओं को अधिकार दिया गया है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को दिया गया एक संवैधानिक अधिकार है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत एक वैधानिक अधिकार है, इसलिए भारत के किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा.

चुनाव आयोग ने बताया कि अधिकांश लोग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से परिचित नहीं हैं, क्योंकि यह झारखण्ड में 23 वर्षों के बाद आयोजित होने जा रहा है. यह एक 'डी-नोवो' (De-novo / नए सिरे से) प्रक्रिया है, जो कि दो चरणों वाली प्रक्रिया है.  जिसमें मतदाता सूची के सभी मौजूदा मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म प्रदान किया जाता है. वे सभी मतदाता जो  इन्यूमरेशन फॉर्म हस्ताक्षर कर जमा करेंगे, उनसे बिना किसी दस्तावेज़ मांगे उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा.  दूसरे चरण में, भारत के नागरिकों से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं.  संबंधित व्यक्ति के अपात्रता के आधार पर, प्रारूप मतदाता सूची में किसी मतदाता के नाम को बाहर करने के लिए प्रपत्र-7 में आपत्ति भी आमंत्रित की जाती है.  हमारे देश में, स्वतंत्रता के बाद से अब तक नौ बार मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण आयोजित किया जा चुका है और वर्तमान में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण 2025-26 हमारे देश का दसवां विशेष गहन पुनरीक्षण है.

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तरह, विशेष गहन पुनरीक्षण भी मतदाताओं और राजनीतिक दलों दोनों के लिए एक पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया है.

इन्यूमरेशन फेज (30 जून 2026 से 29 जुलाई 2026) के दौरान, 2026 की वर्तमान मतदाता सूची के सभी मौजूदा मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म प्रदान किया जाएगा और वे सभी मतदाता जो हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करेंगे, उन्हें एसआईआर 2026 की प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा.  दूसरे शब्दों में, जो भी मतदाता हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करेंगे, चाहे वह किसी भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की पिछली एसआईआर मतदाता सूची (जिसमें 2003 की झारखण्ड एसआईआर मतदाता सूची भी शामिल है) के साथ मैप किया गया हो या नहीं, उन्हें एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा और इन्यूमरेशन फेज के दौरान मतदाताओं द्वारा कोई दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी.

अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की निम्नलिखित पांच श्रेणियों को एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा:

  1. पहले से नामांकित (D - डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि मतदाता):

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 17 और 18 कहती है कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का हकदार नहीं होगा और कोई भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में एक से अधिक बार मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का हकदार नहीं होगा.  झारखण्ड में कुछ ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने इन कानूनी प्रावधानों को जाने या अनजाने में, इरादे से या गलती से, एक से अधिक विधानसभा क्षेत्र और एक ही विधानसभा क्षेत्र में एक से अधिक मतदान केंद्रों में पंजीकरण कराया है.

इस प्रकार के डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टियों वाले मतदाताओं को भी बीएलओ द्वारा उन सभी मतदान केंद्रों पर इन्यूमरेशन फॉर्म प्रदान किए जाएंगे जहां वे मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं.  इस प्रकार के डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि वाले मतदाताओं को अपने इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करके उस मतदान केंद्र क्षेत्र के बीएलओ/ईसीआईनेट को जमा करना चाहिए जहां वे सामान्य रूप से निवास करते हैं.

अन्य सभी इन्यूमरेशन फॉर्म को संबंधित बीएलओ को बिना हस्ताक्षर किए वापस कर दिया जाना चाहिए, जिन्होंने इसे प्रदान किया था.  फॉर्म को वापस करने का कारण इन्यूमरेशन फॉर्म के शीर्ष पर लिखित रूप में दर्ज करना होगा और संबंधित बीएलओ से रसीद के रूप में दूसरी इन्यूमरेशन फॉर्म की प्रति पर पावती भी प्राप्त करनी होगी.

इस प्रकार, ये डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि वाले मतदाता उस मतदान केंद्र में शामिल किए जाएंगे जहां उन्होंने हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया है और उनका नाम उन मतदान केंद्रों में शामिल नहीं किया जाएगा जहां उन्होंने कारणों के साथ अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म वापस कर दिए हैं.  बीएलओ डुप्लिकेट/एकाधिक प्रविष्टि वाले मतदाताओं के इन सभी अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म को ईसीआईनेट पर अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की श्रेणी के तहत 'पहले से नामांकित' के रूप में अपनी रिपोर्ट के साथ अपलोड करेंगे.

  1. मृत (D - Dead):

मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभ्यास के हिस्से के रूप में सभी मृत मतदाताओं के नाम मौजूदा 2026 की मतदाता सूची से हटाए जाने हैं और उन्हें एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

क्योंकि 2026 की मतदाता सूची में मौजूदा मतदाताओं की सभी प्रविष्टियों के लिए दो प्रतियों में इन्यूमरेशन फॉर्म मुद्रित किए जाएंगे, इसलिए इन मृत मतदाताओं के परिवारों के सदस्यों को बीएलओ द्वारा इन्यूमरेशन फॉर्म की दो प्रतियां मुद्रित और वितरित की जाएंगी. इन सभी मृत मतदाताओं के इन्यूमरेशन फॉर्म को परिवार के सदस्य द्वारा संबंधित बीएलओ को बिना हस्ताक्षर किए वापस कर दिया जाना चाहिए.  मृत मतदाता के परिवार के सदस्यों में से किसी एक द्वारा इन्यूमरेशन फॉर्म के शीर्ष पर लिखित रूप में कारण दर्ज करना होगा और संबंधित बीएलओ से रसीद के रूप में दूसरी इन्यूमरेशन फॉर्म की प्रति पर पावती भी प्राप्त करनी होगी.  परिवार के सदस्यों के पास यदि मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध हो, तो उसकी प्रति बीएलओ को उपलब्ध करा सकते हैं.  इस प्रकार, मृत मतदाताओं की इन प्रविष्टियों को उन मतदान केंद्रों के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा जहां मृत मतदाताओं के परिवार के सदस्य ने कारणों के साथ अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म वापस कर दिए हैं.  बीएलओ मृत मतदाताओं के इस प्रकार के सभी अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म को ईसीआईनेट पर अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की श्रेणी के तहत ‘मृत’' के रूप में अपलोड करेंगे.

  1. स्थायी रूप से स्थानांतरित (S - Permanently Shifted):

रोजगार, विवाह या किसी अन्य कारण से, 2026 की मतदाता सूची के कुछ मतदाता स्थायी रूप से दूसरे मतदान केंद्र क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं और उन्होंने पहले से पंजीकृत मतदान केंद्र से अपना नाम नहीं हटवाया है.  इन सभी स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम मौजूदा 2026 की मतदाता सूची से हटाए जाने हैं और इन्हें एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.  क्योंकि  2026 की मतदाता सूची में मौजूदा मतदाताओं की प्रत्येक प्रविष्टि के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में मुद्रित किए जाएंगे, और बीएलओ द्वारा इन स्थानांतरित मतदाताओं के परिवार के सदस्यों को वितरित की जाएंगी.  कुछ मामलों में, इन्यूमरेशन फॉर्म परिवार के सदस्यों को वितरित नहीं किए जा सकेंगे क्योंकि पूरा परिवार ही नए मतदान केंद्र क्षेत्र में स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया है.  इन सभी स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के एइन्यूमरेशन फॉर्म को संबंधित बीएलओ को बिना हस्ताक्षर किए वापस कर दिया जाना चाहिए.  परिवार के सदस्यों में से किसी एक द्वारा  इन्यूमरेशन फॉर्म के शीर्ष पर लिखित रूप में कारण दर्ज करना होगा और संबंधित बीएलओ से रसीद के रूप में दूसरी  इन्यूमरेशन फॉर्म की प्रति पर पावती भी प्राप्त करनी होगी.  इस प्रकार, इन स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टि को उन मतदान केंद्रों में शामिल नहीं किया जाएगा जहां परिवार के सदस्य ने कारणों के साथ अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म वापस कर दिए हैं.

यदि पूरा परिवार स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया है, तो बीएलओ फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर अपना निष्कर्ष लिखने के लिए एइन्यूमरेशन फॉर्म में नीचे दिए गए स्थान पर लिखित रूप में कारण दर्ज करेगा.  बीएलओ स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के इस प्रकार के सभी अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म को ईसीआईनेट पर अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म श्रेणी के तहत 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' के रूप में अपलोड करेंगे.

  1. अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाता (A - Absent/Untraceable Voters):

कुछ विधानसभा क्षेत्रों के कुछ मतदान केंद्रों में मतदाताओं के नामों की कुछ ऐसी प्रविष्टियां हैं, जिनके बारे में कोई नहीं जानता.

इन मतदाताओं ने कभी बीएलओ से संपर्क नहीं किया, और बीएलओ तथा उस संबंधित मतदान केंद्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत स्थानीय मतदाताओं को भी मतदाता सूची में इन मतदाताओं की प्रविष्टियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

इन सभी अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाताओं के नाम मौजूदा 2026 की मतदाता सूची से हटाए जाने हैं और इन्हें एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.  चूंकि 2026 की मतदाता सूची में मौजूदा मतदाताओं की प्रत्येक प्रविष्टि के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में मुद्रित किए जाएंगे, इसलिए दो प्रतियां मुद्रित की जाएंगी.  बीएलओ द्वारा स्थानीय मतदाताओं से उचित पूछताछ के बाद भी मतदान केंद्र क्षेत्र में ऐसा कोई मतदाता न होने के कारण ये इन्यूमरेशन फॉर्म वितरित नहीं किए जा सकेंगे.

चूंकि ये अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाता नहीं मिल सके, इसलिए बीएलओ फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर अपना निष्कर्ष लिखने के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म में नीचे दिए गए स्थान पर लिखित रूप में कारण दर्ज करेगा.  बीएलओ अनुपस्थित/अप्राप्य मतदाताओं के इस प्रकार के सभी अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म को ईसीआईनेट पर अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की श्रेणी के तहत 'अनुपस्थित/अप्राप्य' के रूप में अपलोड करेंगे.

  1. इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इंकार (Refused to sign EF) (F - विदेशी / Foreigners):*

इस श्रेणी के अंतर्गत मतदाताओं की दो उप-श्रेणियां आती हैं.  पहली - 2026 की मतदाता सूची में कुछ ऐसे मौजूदा मतदाता हैं जो दूसरे देश में चले गए हैं और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली है, लेकिन उन्होंने भारत की मतदाता सूची से अपना नाम नहीं हटवाया है.  दूसरी - झारखण्ड में कुछ विदेशी नागरिक कानूनी और अवैध दोनों तरीकों से रह रहे हैं.  झारखण्ड में कानूनी या अवैध रूप से रह रहे इन कुछ विदेशियों ने पिछले एसएसआर या मतदाता सूची के कंटिन्यूअस अपडेशन के दौरान प्रपत्र-6 में झूठी घोषणा देकर अवैध रूप से मतदाताओं के रूप में अपना पंजीकरण कराया है.  जागरूकता गतिविधियों और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर कि विदेशी नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकते (और ईसीआई के इन निर्देशों को भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है कि विदेशी, मतदाता के रूप में पंजीकरण करने के हकदार नहीं हैं), यह उम्मीद की जाती है कि इन विदेशियों को उनके द्वारा पहले दी गई झूठी घोषणा का एहसास हो गया होगा और वे इस चल रही 2026 एसआईआर प्रक्रिया में भाग लेने से खुद को दूर रखेंगे.

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 और भारत में रहने वाले विदेशियों पर लागू अन्य कानून के तहत, इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करके झूठी घोषणा देना एक दंडनीय अपराध है.  चूंकि 2026 की मतदाता सूची में मौजूदा मतदाताओं की प्रत्येक प्रविष्टि के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में मुद्रित किए जाएंगे, इसलिए मौजूदा मतदाता सूची में अवैध रूप से अपना नाम पंजीकृत कराने वाले इन विदेशी नागरिकों के लिए भी दो प्रतियां मुद्रित की जाएंगी.  चूंकि ये विदेशी नागरिक इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया केवल भारत के नागरिकों के लिए है, झारखण्ड में कानूनी या अवैध रूप से रह रहे इन विदेशी नागरिकों से उम्मीद की जाती है कि वे इन्यूमरेशन फॉर्म को बिना हस्ताक्षर किए बीएलओ को वापस कर देंगे और बीएलओ फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर अपना निष्कर्ष लिखने के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म में नीचे दिए गए स्थान पर लिखित रूप में कारण दर्ज करेंगे.  बीएलओ इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इंकार' (Refused to sign EF) के इन सभी प्रकार के अहस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म को ईसीआईनेट पर अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की श्रेणी के तहत अपलोड करेंगे.

5 श्रेणियों के अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म एएसडीडी (ASDD - Absent, Shifted, Duplicate, Death) सूची का हिस्सा होंगे और इस सूची को सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ-बीएलए-2 की बैठक के समक्ष रखा जाएगा. इस बीएलओ-बीएलए-2 बैठक की कार्यवाही दर्ज की जाएगी और फिर इस बैठक की कार्यवाही और तस्वीर को भी संबंधित बीएलओ द्वारा ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा. बीएलए-2 की नियुक्ति मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करने और बीएलओ स्तर पर तैयार की जा रही मतदाता सूची का समकालीन अंकेक्षण/जांच करने के लिए की जाती है.  

यह एएसडीडी सूची सभी मतदान केंद्रों, पंचायत भवन, शहरी स्थानीय निकायों के कार्यालयों में प्रकाशित की जाएगी और प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के दौरान सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को एएसडीडी सूची की एक प्रति भी प्रदान की जाएगी, जो कि 5 अगस्त 2026 को निर्धारित है.  यह जिला निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर भी सर्चेबल फॉर्मेट में उपलब्ध होगी.