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Jharkhand

मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में शामिल हुए सीएम हेमंत,कहा अपनी जड़ को मजबूत करने की जरूरत  

Samir Hussain
Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर

रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित जन-समुदाय को संताली भाषा में संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को और मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया. इस कार्यक्रम में सीएम हेमंत सोरेन के साथ विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.  

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त है, जिन्हें भारतीय संविधान में भी मान्यता दी गई है. उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं , जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं किया जा सकता. उन्होंने महासम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को  शुभकामनाएं देते हुए समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने की दिशा में किए जा रहे सार्थक प्रयासों की सराहना की. साथ ही, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण आवश्यक है. उनकी देखभाल कैसे करना है, उसके लिए हम सभी हैं.

आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज

मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है. समाज की जड़ मजबूत है, परंतु शाखाएं भिन्न हो गई है. वर्तमान समय में समाज के कुछ लोग हिन्दू मानते हैं, तो कुछ लोग सरना कहते हैं. लोग जनजातीय भाषा भी बोल रहे हैं और हिन्दी भी.  हमारे पूर्वज जंगलों में वास करते हैं. जंगल से रोजगार मिलता है. जंगल हमारे लिए भगवान के समान है.

अपनी पारंपरा व रीति- रिवाज को समझें युवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी दिशोम गुरू शिबू सोरेन और पूजनीय माता रूपी सोरेन का निधन हो गया है.  पारंपरिक विधि-विधान व रीति रिवाज के साथ उनका द्वादशकर्म संपन्न किया गया. उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि उन्हें अपनी परंपरा, रीति- रिवाज को समझना चाहिए. साथ ही अपनी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आज दुनिया इतनी तरक्की कर गई है कि लोग चांद पर पहुंच गए हैं. वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं. आदिवासी समाज अभी भी शैक्षणिक, बुद्धिमता व आर्थिक रूप से कमजोर हैं. समाज के उत्थान के लिए हमसबों को एकत्रित व संगठित होना होगा. उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो दिया है, उसे हम खोते जा रहे हैं. हमारे समाज में जीविकोपार्जन का मुख्य साधन पशुपालन व कृषि कार्य था, लेकिन वर्तमान पीढ़ी इससे दूर हो रहा है. उन्होंने कहा स्थानीय स्तर पर आप सभी ने सुदिव्य कुमार सोनू जी को विधायक बनाया था और मैने उन्हें मंत्री पद देकर क्षेत्र का मान बढ़ाया था, परंतु कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. वे हमलोग से दूर हो गये. उन्होंने कहा कि उनके पिताजी दिशोम गुरू शिबू सोरेन से राज्य को बड़ी शक्ति मिली. उन्होंने झारखंड राज्य को अलग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन राज्य अलग हुए 25 वर्ष से अधिक समय हो गए परंतु अभी भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ.  उन्होंने कहा कि अभी विकास के पथ पर अग्रसर रहने के लिए हमलोगों को तैयार होना होगा.

नशाखोरी कर रहा कमजोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशाखोरी आदिवासी समाज को कमजोर कर रहा है. समाज के लोग नशाखोरी के गिरफ्त में हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए योजना बनाई है.  'नशामुक्त जीवन हो हमारा' को लेकर सामूहिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही झारखंड में हड़िया और अवैध शराब (दारू) के निर्माण व बिक्री की रोकथाम के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना चलाई जा रही है. इस योजना का उद्देश्य हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को  सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना है. उन्होंने लोगों से नशामुक्त समाज निर्माण की ओर कदम बढ़ाते हुए नशाखोरी बंद करने की अपील की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पिछले 2 साल से कई सारे नजदीकी लोगों की मृत्यु से आहत हैं.  उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच के द्वारा जो ज्ञापन दिया गया है, उसपर पर न्याय संगत बात होगी. समाज के लोगों को हर संभव मदद मिलेगी.

महासम्मेलन में विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू सहित झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधिण के अलावा आसाम, ओड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे.

गार्ड ऑफ ऑनर

मुख्यमंत्री को गिरिडीह के पीरटांड़ मधुबन स्थित सी.आर.पी.एफ. कैंप परिसर स्थित हैलिपैड पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर किया गया. साथ ही आईजी, डीआईजी, उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वागत किया गया.