Jharkhand

JPSC परीक्षा घोटाले में CID का शिकंजा और कसा, पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते से फिर शुरू हुई पूछताछ

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार तेज होती जा रही है. इस मामले में सोमवार को भी सीआईडी (CID) के नोटिस पर आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते पूछताछ के लिए सीआईडी मुख्यालय पहुंचे हैं. अधिकारियों ने उनसे आयोग की कार्यप्रणाली, परीक्षा संचालन, ओएमआर शीट में कथित हेरफेर और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर विस्तृत पूछताछ की.

जांच एजेंसी का मानना है कि पूर्व चेयरमैन से पूछताछ के दौरान मिले जवाब पूरे मामले की परतें खोलने में अहम साबित हो सकते हैं. इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा. सीआईडी अब मामले के मुख्य आरोपियों से दोबारा पूछताछ की तैयारी में भी जुट गई है. इसके लिए एजेंसी सोमवार को अदालत में आवेदन देकर कुछ आरोपियों को फिर से रिमांड पर लेने की मांग करेगी. इनमें जेपीएससी की तत्कालीन परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) के निदेशक रामबीर सिंह और एजेंसी से जुड़े मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी शामिल हैं. जांच एजेंसी का मानना है कि इन सभी से आमने-सामने पूछताछ करने पर परीक्षा में हुई कथित धांधली से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं.

इसी बीच सीआईडी की जांच में एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत भी मिले हैं. गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ऐसे गिरोह की जानकारी मिली है, जो सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने का काम करता था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सुमन सौरभ के पास ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी नहीं मिली, जिससे संदेह और गहरा गया है. फिलहाल एजेंसी उसके द्वारा दी गई जानकारियों का सत्यापन कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

सीआईडी ने अब जेपीएससी की फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (रेंजर) परीक्षा की भी जांच शुरू कर दी है. इस परीक्षा में भी ओएमआर शीट में कथित हेरफेर के आरोपों की पड़ताल की जा रही है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि 170 पदों वाली इस भर्ती में कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर सेटिंग की गई थी. जांच के दायरे में एक आईआरबी जवान और वन विभाग से जुड़े कुछ वनरक्षी भी बताए जा रहे हैं, जिनके बीच संपर्कों की जांच की जा रही है.

मामले में टीडीपीएल के एक अन्य निदेशक सत्यपाल सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में है. सीआईडी की टीम जब उन्हें पकड़ने लखनऊ स्थित उनके ठिकाने पर पहुंची, तब तक वह फरार हो चुके थे. अब उनकी गिरफ्तारी के लिए एजेंसी गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कराने की तैयारी कर रही है. इससे पहले टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह को सीआईडी गिरफ्तार कर चुकी है. लगातार हो रही गिरफ्तारियों, पूछताछ और छापेमारी से साफ है कि जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले की जांच निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कई अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.