Jharkhand

झारखंड की जेलों में होगा बदलाव, 4 सेंट्रल जेलों में बनेंगे ओपन बैरक

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड की जेलों में बंद कैदियों की जिंदगी में बदलाव लाने की तैयारी चल रही है. कोशिश है कि जेल में सजा काट रहे कैदियों को बेहतर माहौल मिले और सजा पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा सामान्य जिंदगी शुरू करने में आसानी हो. इसी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में ओपन जेल की व्यवस्था और उसकी निगरानी से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट इस मामले पर नजर बनाए हुए है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि ओपन जेल को लेकर काम आगे बढ़ाया जा रहा है. सरकार इससे जुड़ी पूरी रिपोर्ट 3 नवंबर तक कोर्ट में पेश करेगी. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी.

चार सेंट्रल जेलों में बनेंगे ओपन बैरक

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक बनाने की तैयारी है. इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी भी मिल चुकी है.

वहीं हजारीबाग में ओपन जेल के विस्तार के लिए करीब 32 एकड़ सरकारी जमीन की पहचान की गई है. इससे जुड़ा प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जा चुका है.

महिला कैदियों के लिए भी अलग से ओपन जेल की सुविधा तैयार करने पर विचार किया जा रहा है.

पूरी ओपन जेल बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था

ओपन जेल तैयार होने में समय लग सकता है. ऐसे में तब तक मौजूदा सेंट्रल जेलों में ही ओपन बैरक जैसी व्यवस्था बनाने की तैयारी है. रांची, हजारीबाग और दुमका समेत चार सेंट्रल जेलों में ऐसी सुविधा देने की बात कही गई है.

आखिर क्या होती है ओपन जेल?

आसान भाषा में समझें तो ओपन जेल सामान्य जेल से थोड़ी अलग होती है. इसमें ऐसे कैदियों को रखा जाता है, जिनका जेल में व्यवहार अच्छा रहा हो और जो तय नियमों को पूरा करते हों. यहां सामान्य जेल के मुकाबले पाबंदियां कुछ कम होती हैं.

इसका मकसद कैदियों को सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा समाज से जुड़ने के लिए तैयार करना है.

कैदियों की जिंदगी बेहतर करने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद देशभर में ओपन जेल की व्यवस्था और जेल सुधार पर जोर दिया जा रहा है. इसके तहत कैदियों के लिए इलाज, पौष्टिक खाना और मनोरंजन जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की भी बात है.

पूरी कोशिश यह है कि सजा काटने के बाद कैदी जब जेल से बाहर आएं तो वे अपराध से दूर रहकर एक सामान्य जिंदगी शुरू कर सकें और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ सकें.