Jharkhand

JSSC भर्ती में सर्टिफिकेट का खेल? एक ही प्रमाण पत्र पर दो नियम, एक में नियुक्ति तो दूसरे में रोक दिया रिजल्ट

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा पास करना ही अब पूरी चुनौती नहीं रह गई है. नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों की वैधता को लेकर अपनाए जा रहे अलग-अलग मानकों ने नई परेशानी खड़ी कर दी है. JSSC की अलग-अलग भर्तियों में EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने का आरोप सामने आया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही आयोग की परीक्षाओं में प्रमाण पत्र की वैधता के अलग-अलग नियमों के कारण कुछ उम्मीदवार नियुक्ति से बाहर हो रहे हैं, जबकि कुछ अन्य भर्तियों में इसी तरह के प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा भी की जा चुकी है.

एक जगह पुराना प्रमाण पत्र जरूरी, दूसरी भर्ती में नया मान्य
अभ्यर्थियों के मुताबिक, कुछ नियुक्तियों में दस्तावेज सत्यापन के दौरान आवेदन की अंतिम तारीख तक या उससे पहले जारी EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. इसके साथ सत्यापन वाले वर्ष का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर कुछ नियुक्तियों में केवल दस्तावेज सत्यापन के वर्ष में जारी प्रमाण पत्र को आधार बनाकर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा किए जाने का दावा किया जा रहा है. इससे उन उम्मीदवारों में नाराजगी है, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद भी प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों के कारण नियुक्ति प्रक्रिया में परेशानी का सामना किया.

अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल भर्ती विज्ञापन को लेकर है. उनका कहना है कि आवेदन के समय यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि EWS या OBC-NCL अभ्यर्थियों को किस वित्तीय वर्ष का प्रमाण पत्र देना होगा. कई मामलों में आवेदन के दौरान प्रमाण पत्र जमा भी नहीं कराया जाता. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग शर्तें सामने आने से अभ्यर्थियों को मुश्किल होती है.

महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति प्रक्रिया में अद्यतन EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा किए जाने की बात सामने आई है. दावा है कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र नहीं था. इनमें कुछ उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी मिल चुका है, जबकि कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर नियुक्ति रोक दी गई. जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्हें बाद में विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है.

माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में भी प्रमाण पत्र को लेकर विवाद सामने आया है. अलग-अलग विषयों में दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए गए 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोके जाने की बात कही जा रही है. इन अभ्यर्थियों से आवेदन के समय और दस्तावेज सत्यापन के दौरान संबंधित वित्तीय वर्ष के EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं. उर्दू विषय के एक अभ्यर्थी से आवेदन की अंतिम तारीख तक या उससे पहले जारी EWS प्रमाण पत्र मांगे जाने की जानकारी भी सामने आई है.

आखिर प्रमाण पत्र को लेकर नियम क्या है?
EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र संबंधित वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी होते हैं. लंबी भर्ती प्रक्रिया को देखते हुए नियुक्ति के समय उम्मीदवार से अपडेटेड प्रमाण पत्र मांगा जाना भी जरूरी हो सकता है. लेकिन अभ्यर्थियों की मांग है कि आवेदन से लेकर नियुक्ति तक प्रमाण पत्र की शर्तें पहले से स्पष्ट और सभी भर्तियों में एक समान हों. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि JSSC अलग-अलग नियुक्तियों में प्रमाण पत्र को लेकर एक समान नियम कब तय करेगा और जिन अभ्यर्थियों को नियमों की अस्पष्टता के कारण परेशानी हुई है, उनके मामले में क्या समाधान निकलेगा.