रांची (RANCHI): कड़ी मेहनत, सही रणनीति और तकनीकी कौशल के दम पर झारखंड के दो युवाओं ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना देशभर के लाखों इंजीनियरिंग छात्र देखते हैं. BIT मेसरा के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र कुशाग्र सहाय और अंकित कुमार का चयन दुनिया की अग्रणी प्रोफेशनल नेटवर्किंग कंपनी LinkedIn में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर (SDE) के पद पर हुआ है. कैंपस प्लेसमेंट के दौरान कुशाग्र को 1.40 करोड़ रुपये और अंकित को 1.09 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज मिला है. इस उपलब्धि से न केवल संस्थान, बल्कि पूरे झारखंड का गौरव बढ़ा है.
करोड़ों का पैकेज, BIT मेसरा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि
रांची निवासी कुशाग्र सहाय और पलामू (डाल्टनगंज) के अंकित कुमार ने कैंपस प्लेसमेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए करोड़ों रुपये के पैकेज हासिल किए. दोनों की सफलता ने BIT मेसरा के प्लेसमेंट रिकॉर्ड में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया. संस्थान के निदेशक, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने दोनों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
कॉलेज के पहले दिन से तय कर लिया था लक्ष्य
कुशाग्र सहाय ने बताया कि कॉलेज में प्रवेश लेते ही उन्होंने अपने करियर का लक्ष्य तय कर लिया था. उन्होंने सीनियर्स और पूर्व छात्रों के अनुभवों से प्लेसमेंट की तैयारी की दिशा तय की. पढ़ाई के साथ-साथ वे कॉलेज के कोडिंग क्लब से जुड़े और डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिद्म, सिस्टम डिजाइन तथा अन्य तकनीकी विषयों पर लगातार मेहनत की. उनका मानना है कि किसी भी बड़ी कंपनी में चयन के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल और लगातार प्रैक्टिकल अभ्यास भी जरूरी है.
रियल-लाइफ प्रोजेक्ट्स बने सफलता की सबसे बड़ी वजह
कुशाग्र ने कई तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिनमें से कुछ आज भी उपयोग में हैं. इंटरव्यू के दौरान इन्हीं प्रोजेक्ट्स ने चयनकर्ताओं को सबसे अधिक प्रभावित किया. उनका कहना है कि वास्तविक समस्याओं पर काम करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और इंटरव्यू में अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलता है.
कोडिंग का जुनून दिला गया करोड़ों की नौकरी
अंकित कुमार ने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही कोडिंग और प्रोग्रामिंग में रुचि थी. इसी जुनून को उन्होंने अपने करियर की ताकत बनाया. उन्होंने कॉम्पिटेटिव प्रोग्रामिंग में लगातार हिस्सा लिया और डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिद्म, ऑपरेटिंग सिस्टम, डीबीएमएस जैसे विषयों की गहराई से तैयारी की. अंकित का कहना है कि आज कंपनियां सिर्फ डिग्री या अच्छे अंक नहीं देखतीं, बल्कि उम्मीदवार की समस्या सुलझाने की क्षमता, लॉजिकल सोच और व्यावहारिक कौशल को अधिक महत्व देती हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा अनिरुद्ध प्रसाद और पूरे परिवार के सहयोग को दिया.
