Jharkhand

BREAKING: नाथवानी नामांकन विवाद पर विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा, सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद को नहीं मिली बैठक में एंट्री

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर जारी विवाद बुधवार को और गहरा गया. नामांकन पर दर्ज आपत्तियों की सुनवाई के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया. कांग्रेस की ओर से पहुंचे वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध जताया.

जानकारी के अनुसार, परिमल नाथवानी के नामांकन से संबंधित आपत्तियों पर रिटर्निंग ऑफिसर सह विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार औपचारिक सुनवाई कर रहे थे. सुबह करीब 11 बजे से नाथवानी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत करने शुरू कर दिए थे. दूसरी ओर, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की ओर से आपत्ति और कानूनी पक्ष रखने के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद को रांची बुलाया था.

सलमान खुर्शीद बुधवार दोपहर को झारखंड विधानसभा पहुंचे. उनके साथ राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी मौजूद थे. विधानसभा पहुंचने के बाद मीडिया कर्मियों ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की और सीधे संबंधित प्रक्रिया की ओर बढ़ गए.

हालांकि, कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सलमान खुर्शीद को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई. पार्टी नेताओं का कहना है कि जब नाथवानी पक्ष के अधिवक्ताओं को अपनी दलील रखने का अवसर दिया गया, तब कांग्रेस की ओर से पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता को मौका नहीं देना निष्पक्ष प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है. कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई.

मामले को लेकर मंत्री इरफान अंसारी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं चल रही है और चुनाव आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाना कई सवाल खड़े करता है.

उधर, परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस लगातार आपत्ति जता रही है और उनके नामांकन को रद्द करने की मांग कर रही है. सुनवाई के दौरान विधानसभा परिसर में दिनभर राजनीतिक हलचल, विरोध और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा. अब सभी की निगाहें रिटर्निंग ऑफिसर के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा.