रांची (RANCHI): झारखंड की मशहूर आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत हो गई है. उन्होंने कथित तौर पर मानसिक तनाव और लगातार हो रही बदनामी से आहत होकर आत्महत्या का प्रयास किया था. घटना से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी बात सोशल मीडिया के जरिए रखी है. इस दौरान उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात कही थी. सूचना मिलने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
लाइव वीडियो में छलका दर्द, बोलीं- मेरे साथ कोई नहीं है
आत्मघाती कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर किए गए लाइव वीडियो में निशा भगत काफी भावुक और परेशान नजर आ रही थीं. उन्होंने रोते हुए कहा था कि मुश्किल वक्त में उनके साथ कोई खड़ा नहीं है और वह लंबे समय से अकेले संघर्ष कर रही हैं. वीडियो के दौरान वह बार-बार अपनी जिंदगी खत्म करने की बात कहती सुनाई दीं. उन्होंने यह भी कहा था कि उनके इस कदम से उनके माता-पिता को काफी दुख पहुंचेगा. लाइव के दौरान निशा भगत ने खुद को किसी का दलाल बताए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने साफ कहा था कि वह किसी की दलाल नहीं हैं. उनका आरोप था कि कुछ लोग लगातार उन्हें बदनाम कर रहे हैं, लेकिन शिकायत करने के बावजूद ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने अपनी परेशानी और बेबसी जाहिर करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया, उसके बाद वह यह कदम उठाने को मजबूर हुई हैं.
आरएसएस और बीजेपी के लोगों का भी साथ नहीं मिलने की कही थी बात
लाइव वीडियो में निशा भगत ने यह भी कहा था कि मुश्किल समय में आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोग भी उनके साथ खड़े नहीं हैं. वह अपने अकेलेपन और लंबे समय से जारी संघर्ष को लेकर काफी भावुक थीं. उन्होंने अपने खिलाफ कथित रूप से की जा रही बयानबाजी और बदनामी को लेकर भी सवाल उठाए थे. साथ उन्होंने यह भी कहा था की उनके माता-पिता को भी उनकी वजह से काफी बातें सुननी पड़ती थी.
निशा भगत की पहचान आदिवासी समाज के अधिकारों और हितों के लिए आवाज उठाने वाली नेत्री के रूप में रही है. वह आदिवासी अस्मिता और सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर होकर अपनी बात रखती थीं. पिछले वर्ष सरना धर्म से संबंधित मांगों को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपना सिर मुंडवा लिया था. इस कदम के बाद वह काफी चर्चा में आई थीं.
उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों में शोक है. घटना ने सोशल मीडिया पर होने वाली बदनामी, सार्वजनिक आरोपों और मानसिक दबाव जैसे सवालों को भी चर्चा में ला दिया है. हालांकि, निशा भगत की मौत के पीछे की परिस्थितियों और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि तथा पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी सामने आना बाकी है.
