रांची (RANCHI): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में पिछले 26 दिनों से जारी छात्रों का आंदोलन फिलहाल थम गया है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लंबे समय से धरने पर बैठे छात्रों ने अपना प्रदर्शन स्थगित करने का फैसला लिया है और अब टेंट भी हटाये जा रहे हैं. हालांकि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. छात्रों ने सरकार को साफ तौर पर 60 दिनों का समय दिया है और चेतावनी दी है कि तय अवधि में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई तो वे फिर से सड़क पर उतरेंगे. छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर जो प्रक्रिया चल रही है, उसे पूरा करने के लिए फिलहाल दो महीने का समय दिया जा रहा है. लेकिन इस दौरान अगर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता है, तो आंदोलन को पहले से ज्यादा व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा.
धरना स्थल पर लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के बीच प्रशासन की ओर से भी पहल की गई. अनुमंडल पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की. अधिकारियों ने छात्रों को मामले की संवेदनशीलता और सरकार के स्तर पर चल रही प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी. प्रशासन की ओर से बातचीत और आश्वासन के बाद छात्रों ने फिलहाल धरना स्थगित करने पर सहमति जताई. हालांकि छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे हैं और सरकार के अगले कदम पर उनकी नजर बनी रहेगी.
छात्र प्रतिनिधियों का आरोप है कि झारखंड में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का मामला किसी एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक PGT, लैब असिस्टेंट समेत कई अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं. आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि जिन भी परीक्षाओं को लेकर शिकायतें या संदेह सामने आए हैं, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए. छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है, जिन्होंने मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा दी है. उनका कहना है कि योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को देखते हुए जांच सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए.
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर समय-सीमा भी तय कर दी है. उनकी प्रमुख मांग है कि अगले 60 दिनों के भीतर संबंधित मामलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए. छात्र चाहते हैं कि पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो और इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके. छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर राज्य स्तर पर होने वाली जांच निष्पक्ष और संतोषजनक नहीं रही, तो वे मामले की जांच CBI से कराने की मांग करेंगे. उनका कहना है कि जांच को लेकर किसी भी तरह का पक्षपात या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. छात्रों का भरोसा तभी बहाल होगा, जब जांच के नतीजे सामने आएंगे और दोषियों पर कार्रवाई होगी.
धरना स्थगित करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं है. फिलहाल सरकार को काम करने का मौका दिया गया है. अब 60 दिनों तक सरकार और जांच की प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी. अगर तय समय के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती या छात्रों को सरकार की कार्रवाई संतोषजनक नहीं लगती है, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा. छात्रों ने संकेत दिया है कि इस बार आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जा सकता है. यानी फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों से चल रहा धरना थम गया है, लेकिन छात्रों और सरकार के बीच टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अगले 60 दिन अब इस पूरे मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं.
