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Jharkhand

बड़ी खबर: झारखंड-पश्चिम बंगाल के 4 ठिकानों पर एक साथ ED की दबिश, GST फर्जीवाड़े मामले में छापेमारी जारी

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): प्रवर्तन निदेशालय यानी की ED एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आ रही है. इसी कड़ी में आज सुबह से ही प्रवर्तन निदेशालय की टीम GST फर्जीवाड़े से जुड़े मामले को लेकर झारखंड और पश्चिम बंगाल के करीबन चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. बताते चलें कि यह छापेमारी जमशेदपुर और बोकारो में जारी है. ऐसे में ED इस छापेमारी के दौरान यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर GST फर्जीवाड़े में कौन-कौन से लोग शामिल हैं.

इस कार्रवाई के बाद फर्जी इनवॉइस के जरिए गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने वाले नेटवर्क में खलबली मच गई है. जांच एजेंसियां कथित शेल कंपनियों के माध्यम से संचालित वित्तीय लेनदेन और उनसे जुड़े बैंक खातों की गहन पड़ताल कर रही हैं. तलाशी अभियान के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई थी, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं. इसके अलावा कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, कथित फर्जी बिलिंग बुक और विभिन्न वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच टीम के हाथ लगे हैं.

क्या है पूरा मामला?

मामला कथित तौर पर करोड़ों रुपये के GST फर्जीवाड़े से जुड़ा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में बिना वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति किए कागजों पर लेनदेन दिखाकर फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे. इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किए जाने का आरोप है. जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर शेल कंपनियों और दूसरे वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने और उसे वैध दिखाने के लिए किया जाता था.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय पहले भी कार्रवाई कर चुका है. जांच एजेंसी ने इससे पहले झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में तलाशी अभियान चलाया था. पिछली कार्रवाई में एजेंसी ने कथित सिंडिकेट के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल शिव कुमार देवड़ा को गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था. पिछली जांच के दौरान 700 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी इनवॉइस नेटवर्क का खुलासा होने की बात सामने आई थी. छापेमारी के दौरान कई कारोबारियों और बिचौलियों से जुड़े ठिकानों से बड़ी संख्या में कथित फर्जी बिल और अन्य वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए थे.