रांची: झारखण्ड हाई कोर्ट में सोमवार को हज़ारीबाग डिटेन्शन सेंटर में महिला के साथ रेप और सजा पूरी होने पर रिहा ना करने के मामले में सुनवाई की. इस सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. साथ ही पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए है. कोर्ट ने साफ पूछा की ज़ब सजा पूरी हो गई इसके बावजूद कैद में कैसे रखा गया. अब इस मामले में अगली सुनवाई 15अक्टूबर को रखी गई.
दरअसल मामला 2018 के समय का है. ज़ब एक बांग्लादेशी महिला को बच्चा चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया. पहला केस इस पर बच्चें के अपहरण का किया गया और दूसरा विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया. पहले मामले में 2साल की सजा हुई जबकि विदेशी अधिनियम केस में 3साल की सजा सुनाई गई. दोनों मामले में महिला की सजा पूरी हो गई. इसके बाद उसे डिटेन्शन सेंटर में डाल दिया गया. इस बीच आरोप है कि महिला को रिहा ना कर उसके साथ यौन शोषण किया गया.
सोमवार को झारखण्ड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और अखिल कुमार की अदालत में सुनवाई हुई. जिसमें हज़ारीबाग डिटेन्शन सेंटर में सजा पूरी होने के बाद भी विदेशी महिला को रखने और रेप मामले में जवाब मांगा.
डालसा ने कोर्ट को सील बंद लिफाफे में दिए जानकारी में बताया कि तीन कांस्टेबल को सस्पेंड करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है.इस दौरान कोर्ट ने FIR में दर्ज धारा पर सवाल पूछा है. जिसमें राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि FIR में संसोधन किया जाएगा.
इस सुनवाई में कोर्ट में गृह सचिव मौजूद रही. जिसमें बताया गया कि महिला के साथ यौन शोषण मामले में तीन पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया. वहीं महिला को वापस उसके देश भेजने के लिए कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है. साथ ही बांग्लादेश की सरकार से भी संपर्क किया गया है. लेकिन केंद्र और बंगालदेश की सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है.
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 2018में महिला पर दो केस दर्ज किए गए है. एक बच्चा अपहरण और दूसरा विदेशी अधिनियम के साथ. बच्चा अपहरण में दो साल कि सजा हुई. वहीं 2021 में विदेशी अधिनियम में तीन साल की सजा हुई. इस बीच 2025में वह भाग गई जिसके बाद दोबारा से केस किया गया है. जिसमें 2026में सजा पूरी हो चुकी है.
