Jharkhand

‘50 साल जेल भेजने’ वाले बयान की याद दिलाकर बाबूलाल ने सीएम को घेरा, बोले- अब CBI जांच से क्यों हट रहे पीछे?

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुराने बयान को सामने रखते हुए उनसे सीधा सवाल किया है. मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री को नवंबर 2024 में किए गए एक वादे की याद दिलाई और पूछा कि जब आज छात्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं, तो सरकार इस जांच की अनुशंसा करने से पीछे क्यों हट रही है.

बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 6 नवंबर 2024 को उन्होंने JSSC-CGL परीक्षा में कथित तौर पर पैसे लेकर सीट बेचने का आरोप उठाया था. उनके मुताबिक, उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके ही पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर युवाओं से जुड़े मामले में कोई गलती साबित हो जाए तो उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. मरांडी ने इसी पुराने बयान को आधार बनाकर मुख्यमंत्री से अब जवाब मांगा है. उन्होंने कहा कि उस समय सरकार की ओर से आरोप लगाने वालों पर ही सवाल उठाए गए थे और उन्हें भाजपा समर्थित कोचिंग माफिया तथा PIL गैंग जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने खुद जांच एजेंसियों के सामने जांच कराने की बात कही थी. अब जब छात्र लगातार CBI जांच की मांग कर रहे हैं, तो सरकार को इस मांग पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में परीक्षा गड़बड़ी में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहती है, तो CBI जांच की सिफारिश करने में परेशानी क्या है? उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि पहले किए गए अपने बयान और आज की सरकार की कार्रवाई के बीच स्पष्टता होनी चाहिए. उनका कहना है कि छात्रों के सवालों का जवाब केवल जांच के आश्वासन से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच से मिलना चाहिए.

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह किसी आरोपी को 50 साल जेल में भेजने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनके मुताबिक, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि जांच निष्पक्ष हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे.

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच बाबूलाल मरांडी का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार की ओर से कई परीक्षाओं को लेकर फैसले लिए जा चुके हैं और जांच एजेंसियां भी मामले की पड़ताल कर रही हैं. अब विपक्ष CBI जांच की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या पुराने बयान के आधार पर कोई नई पहल होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.