Jharkhand

JSSC CGL पेपर लीक में अब ‘बेवल’ पर शिकंजा! कौन है मिथलेश सिंह, जिसके नेटवर्क की CID कर रही जांच

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): JSSC CGL-2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. टीडीपीएल के बाद ‘बेवल’ एजेंसी और उसके संचालक मिथिलेश सिंह जांच एजेंसी के रडार पर आ गए हैं. सीआईडी की एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी आखिर कैसे बाहर पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे.

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित बेवल एजेंसी को दी गई थी. अब जांच टीम एजेंसी के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को खंगाल रही है. एसआईटी की नजर कंपनी के कोलकाता स्थित मुख्य कार्यालय से लेकर झारखंड के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक जुड़े लोगों और गतिविधियों पर है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता में सेंध कहां और किस स्तर पर लगी.

जांच के केंद्र में अब बेवल से जुड़े मिथिलेश सिंह भी हैं. उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और बताया जा रहा है कि वह फिलहाल फरार हैं. सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी को बाहर पहुंचाने में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं. जांच टीम उनके संभावित ठिकानों पर तलाश के साथ-साथ बैंक खातों के लेन-देन, फोन कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. इसके जरिए कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. एसआईटी इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या बेवल से जुड़े किसी व्यक्ति ने बिचौलियों या अन्य संदिग्ध लोगों के साथ मिलकर परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की थी. एजेंसी से जुड़े लोगों और परीक्षा केंद्रों के बीच संपर्क की भी जांच की जा रही है.

सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में कार्रवाई का दायरा भी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. जांच एजेंसी बेवल के कोलकाता स्थित कार्यालय समेत संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी में है. साथ ही कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है. फिलहाल एसआईटी का मुख्य फोकस पेपर लीक की पूरी कड़ी जोड़ने और यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाने में किस-किस की भूमिका थी.