Jharkhand

JPSC के बाद अब JSSC पर भी उठे सवाल! परीक्षा से कुछ घंटे पहले एडमिट कार्ड जारी, आउट ऑफ सिलेबस सवालों पर बवाल

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
JPSC के बाद अब JSSC पर भी उठे सवाल! परीक्षा से कुछ घंटे पहले एडमिट कार्ड जारी, आउट ऑफ सिलेबस सवालों पर बवाल

रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा भी सवालों के घेरे में आ गई है. 19 जुलाई को आयोजित इस परीक्षा को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है. किसी ने परीक्षा के दिन ई-मेल से एडमिट कार्ड मिलने की शिकायत की, तो किसी ने सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने पर नाराजगी जताई. वहीं संथाली भाषा के प्रश्नपत्र को लेकर भी विवाद गहरा गया है. इन सभी आरोपों के बाद अभ्यर्थी परीक्षा की उच्चस्तरीय जांच और दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं.

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कुल 3,22,867 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए थे, लेकिन केवल 86,444 उम्मीदवार ही परीक्षा में शामिल हुए. यानी उपस्थिति महज 26.77 प्रतिशत रही. यह परीक्षा राज्यभर के 813 परीक्षा केंद्रों पर तीन पालियों में आयोजित की गई थी. अभ्यर्थियों का आरोप है कि कई उम्मीदवारों को परीक्षा वाले दिन ही ई-मेल के माध्यम से एडमिट कार्ड की सूचना मिली, जिससे वे परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सके. पश्चिमी सिंहभूम के रामड़ा गांव निवासी राजेश लोहार ने दावा किया कि उन्हें 19 जुलाई को दोपहर 2:59 बजे ई-मेल मिला, जबकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश का समय दोपहर 3 बजे तक ही था. उनका परीक्षा केंद्र जमशेदपुर से करीब 240 किलोमीटर दूर लातेहार में था, जहां इतनी कम सूचना में पहुंचना संभव नहीं था.

इसी तरह पलामू के डालटनगंज निवासी मुकेश प्रजापति ने बताया कि उनका परीक्षा केंद्र लगभग 600 किलोमीटर दूर गोड्डा में बनाया गया था. उन्होंने समय पर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया था, लेकिन कम समय, लगातार बारिश और लंबी दूरी के कारण परीक्षा केंद्र तक पहुंच नहीं सके. उनका कहना है कि यदि केंद्र नजदीक होता तो वे निश्चित रूप से परीक्षा देते. विवाद केवल परीक्षा केंद्र और एडमिट कार्ड तक सीमित नहीं है. संथाली भाषा (पेपर-2) के परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया है कि 100 में लगभग 40 प्रश्न निर्धारित सिलेबस से बाहर पूछे गए. इसके अलावा चार प्रश्नों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि संथाली साहित्य, संस्कृति, लोकगाथाओं और प्रमुख साहित्यकारों से जुड़े कई सवाल त्रुटिपूर्ण थे. इसे लेकर अभ्यर्थियों ने आयोग के परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग की है.

हालांकि, JSSC ने इन आरोपों को खारिज किया है. आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि परीक्षा से संबंधित सभी सूचनाएं समय पर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई थीं. उनके अनुसार 11 से 14 जुलाई के बीच सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी गई थी, जबकि 16 जुलाई से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी वेबसाइट पर सक्रिय था. आयोग का कहना है कि अभ्यर्थी वेबसाइट के माध्यम से आसानी से सभी जरूरी दस्तावेज डाउनलोड कर सकते थे. अब JPSC विवाद के बाद JSSC परीक्षा को लेकर उठे इन सवालों ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है. अभ्यर्थियों को अब जांच और आयोग के अगले कदम का इंतजार है.